जीएसटी सुधार 2025 : नगालैंड के हैंडलूम, कॉफी और पर्यटन उद्योग को मिलेगा बड़ा लाभ

हाल ही में केंद्र सरकार के नेक्स्ट जेनरेशन जीएसीटी सुधारों से नगालैंड की कृषि, हस्तशिल्प, हैंडलूम और पर्यटन पर आधारित अर्थव्यव्स्था नई रफ्तार पकड़ने वाली है। सरकार ने राज्य की स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और उद्यमियों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कई क्षेत्रों में जीएसटी दरों को घटाया है। इस सुधार से उत्पाद सस्ते होंगे, प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और हजारों लोगों की आय में भी बढ़ोतरी होगी।

नए सुधारों के तहत हैंडलूम, बांस-गन्ना उत्पाद, कॉफी और होटल सेवाओं पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है। इसके साथ ही 44,000 महिला बुनकरों, 13,000 बांस एवं बेंत कारीगरों, 2,200 कॉफी उत्पादकों और कई होटल कारोबारियों को सीधा लाभ मिलेगा। नगालैंड के पारंपरिक हस्तशिल्प में हैंडलूम शॉल और वस्त्र प्रमुख हैं, जिनमें प्रसिद्ध “चकहेसांग शॉल” को जीआई टैग भी प्राप्त है। ये वस्त्र मुख्य रूप से कोहिमा, फेक और दीमापुर क्षेत्रों में बनाए जाते हैं। राज्य में हाल ही में कोहिमा में एक राज्य एम्पोरियम हब भी स्थापित किया गया है। यह क्षेत्र लगभग 44,000 लोगों को रोजगार देता है, जिनमें अधिकतर महिलाएं हैं जो घरों में ही बुनाई करती हैं।

अब इन हैंडलूम उत्पादों पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है। इससे 2,500 रुपए तक के वस्त्र लगभग 6.25% सस्ते हो जाएंगे (पहले यह सीमा 1,000 रुपए थी)। इससे बुनकरों की आय बढ़ेगी, उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नगालैंड के वस्त्रों की मांग भी बढ़ेगी। इन उत्पादों का निर्यात अमेरिका, यूएई, यूरोप, दक्षिण अफ्रीका, स्वीडन और कनाडा जैसे देशों में होता है।

पर्यटन क्षेत्र में नई ऊर्जा

नगालैंड का पर्यटन उद्योग मुख्य रूप से कोहिमा, दीमापुर और किसामा के हॉर्नबिल फेस्टिवल के इर्द-गिर्द केंद्रित है। राज्य में होटल और होमस्टे उद्योग भी तेजी से बढ़ रहा है। अब होटल सेवाओं पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है, जिससे ₹7,500 तक के होटल कमरे लगभग 6.25% सस्ते हो जाएंगे। इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

बांस और बेंत उद्योग को बढ़ावा

नगालैंड का बांस एवं बेंत उद्योग मुख्य रूप से सोवीमा (चुमौकेदिमा) और दीमापुर में केंद्रित है, जबकि कई जिले इस क्षेत्र से जुड़े हैं। नगालैंड बांस विकास एजेंसी (NBDA) 2004 से इस क्षेत्र को प्रोत्साहित कर रही है। इस क्षेत्र में लगभग 13,000 लोग कार्यरत हैं, जिनमें कारीगर, एमएसएमई इकाइयाँ और ग्रामीण बढ़ई शामिल हैं। फर्नीचर और हैंडीक्राफ्ट पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% करने से इन उत्पादों की कीमतों में लगभग 6.25% की कमी आएगी। इससे बाजार में इनकी मांग बढ़ेगी और कारीगरों की आय में वृद्धि होगी।

नगालैंड कॉफी को मिला वैश्विक प्रोत्साहन

नगालैंड की कॉफी उद्योग राज्य के कई जिलों- मोकोकचुंग, वखा, मोन, जुन्हेबोटो और तुएनसांग में फैली हुई है। यहां लगभग 2,200 पंजीकृत कॉफी उत्पादक हैं, जिनमें अधिकतर छोटे किसान और एमएसएमई इकाइयाँ हैं। अब भुनी हुई कॉफी पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% और कॉफी एक्सट्रैक्ट पर 18% से घटाकर 5% कर दिया गया है। इससे कॉफी की कीमतें 6% से 11% तक घटेंगी। इससे उत्पादकों को अधिक लाभ मिलेगा और नगालैंड कॉफी की प्रतिस्पर्धात्मकता वैश्विक बाजार में बढ़ेगी। नगालैंड कॉफी का निर्यात दक्षिण अफ्रीका, बहरीन, यूएई, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड्स और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में होता है।

नए जीएसटी सुधारों से नगालैंड की विविध और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी। ये सुधार न केवल उत्पादों को सस्ता बनाएंगे बल्कि स्थानीय उद्योगों की आय और रोजगार के अवसरों में भी उल्लेखनीय वृद्धि करेंगे। हैंडलूम बुनकर, कॉफी उत्पादक, बांस-बेंत कारीगर और होटल संचालक सभी को इसका सीधा लाभ होगा, जिससे नगालैंड की सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक विकास दोनों को मजबूती मिलेगी।-(PIB)