जीएसटी सुधारों से गुजरात को मिलेगा बड़ा आर्थिक लाभ, सस्ते होंगे घी, वस्त्र, हस्तशिल्प और औद्योगिक उत्पाद

केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए जीएसटी सुधार 2025 से गुजरात के ग्रामीण और औद्योगिक दोनों क्षेत्रों को व्यापक लाभ मिलने वाला है। राज्य की अर्थव्यवस्था, जो डेयरी, वस्त्र, हस्तशिल्प, रसायन, सिरेमिक और हीरा उद्योगों पर आधारित है, अब कम टैक्स दरों के कारण और मजबूत होगी। इन सुधारों से आवश्यक वस्तुएं सस्ती होंगी, पारंपरिक उद्योगों को राहत मिलेगी और निर्यात क्षमता में भी वृद्धि होगी। गौरतलब है कि अमूल ब्रांड की गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF) राज्य में 18 सदस्य यूनियनों के माध्यम से लगभग 36 लाख दूध उत्पादकों से दूध एकत्र करती है। जीएसटी सुधारों के बाद मक्खन और घी पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है। इससे घी और मक्खन की कीमतों में 6-7% तक की कमी आएगी। उदाहरण के लिए, पहले 700 रुपए में मिलने वाला 1 किलो घी अब लगभग 40-45 रुपए सस्ता मिलेगा। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और ग्रामीण आय में वृद्धि होगी।

सूरत की जरी इंडस्ट्री, जिसे भारत का “मैनचेस्टर ऑफ इंडिया” कहा जाता है, में अब जरी बॉर्डर पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है। इससे लगभग 1.25 से 1.5 लाख कामगारों को लाभ होगा, जिनमें 70% महिलाएं हैं। सूरत देश के कुल मैन-मेड फैब्रिक उत्पादन का 40% और कुल निर्यात का 18% हिस्सा रखता है। अब साड़ियों की कीमतें लगभग 2-3% घटेंगी, जिससे बिक्री बढ़ेगी। वहीं कच्छ के हस्तशिल्प उद्योग को भी बड़ा फायदा होगा। कच्छ की कढ़ाई पर जीएसटी घटाकर 5% किया गया है। भुज, अंजार, होडका, जामनगर और राजकोट जैसे इलाकों की महिलाएं इस उद्योग से जुड़ी हैं। कच्छ की कढ़ाई, जो जीआई टैग प्राप्त है, देश-विदेश में लोकप्रिय है और अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और यूएई जैसे देशों में निर्यात होती है। अब 3,500 रुपए की कढ़ाईदार शॉल पर टैक्स 420 रुपए से घटकर 175 रुपए रह जाएगा, यानी 245 रुपए की बचत होगी।

बांधनी (टाई-डाई) वस्त्र उद्योग, जो कच्छ और जामनगर में प्रमुख रूप से चलता है, को भी लाभ हुआ है। यहां 5% जीएसटी स्लैब की सीमा 2,500 रुपए तक बढ़ाई गई है, जिससे साड़ियां और दुपट्टे सस्ते होंगे। इस उद्योग में 5,000 से अधिक महिला कारीगर काम करती हैं, और 70% उत्पाद गुजरात से बाहर बिकते हैं। संखेड़ा लकड़ी के फर्नीचर, जो छोटा उदयपुर जिले का पारंपरिक जीआई टैग प्राप्त हस्तशिल्प है, पर भी जीएसटी घटाकर 5% किया गया है। इससे इस चमकीले लाह के काम वाले फर्नीचर की कीमतें लगभग 6-7% तक घटेंगी, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग बढ़ेगी।

खंभात (कैंबे) के अगेट स्टोन क्राफ्ट को भी फायदा होगा। यह हजारों साल पुराना उद्योग है, जो आनंद जिले में फैला है। यहां के कारीगर अगेट पत्थरों से सजावटी वस्तुएं बनाते हैं, जिनकी कीमत 500 से 2,000 रुपए प्रति कैरेट तक होती है। अब जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है, जिससे उत्पाद लगभग 6-7% सस्ते होंगे और अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर बढ़ेंगे। राजकोट, अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा में फैले फरसान और नमकीन उद्योग, जो मुख्यतः एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े हैं, को भी राहत मिली है। गुजरात का स्नैक्स बाजार लगभग 12,000 करोड़ रुपए का है और इसके उत्पाद अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में निर्यात होते हैं। अब 5% जीएसटी दर से पैकेज्ड नमकीन 6-7% सस्ते होंगे, जिससे बिक्री और प्रतिस्पर्धा दोनों बढ़ेंगी।

गुजरात के वापी, अंकलेश्वर, दहेज और वडोदरा में केंद्रित रासायनिक उद्योग को अब सल्फ्यूरिक एसिड और अमोनिया जैसे इनपुट्स पर जीएसटी 18% से घटाकर 5% किया गया है। इससे उर्वरक, डाई और दवा निर्माण उद्योगों की लागत 2-4% तक घटेगी। राज्य के इस क्षेत्र में लगभग 10 लाख लोग काम करते हैं और यह भारत के कुल रासायनिक उत्पादन का 60% हिस्सा है। इससे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में वृद्धि होगी। मोरबी का सिरेमिक उद्योग, जो विश्व का दूसरा सबसे बड़ा क्लस्टर है, में 1,100 से अधिक इकाइयाँ हैं और यह भारत के 90% सिरेमिक उत्पादन के लिए जिम्मेदार है। इसका वार्षिक कारोबार $6.5 बिलियन है और $2.3 बिलियन का निर्यात होता है। सिरेमिक टेबलवेयर पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% किया गया है, जिससे उत्पाद 6-7% सस्ते होंगे। इससे होटल, घरेलू उपभोक्ताओं और निर्यात बाजार में मांग बढ़ेगी।

वहीं सूरत, जो विश्व का सबसे बड़ा हीरा कटिंग और पॉलिशिंग केंद्र है, में 15 लाख से अधिक लोग काम करते हैं। अब 25 सेंट तक के छोटे कटे और पॉलिश किए हीरे पर आईजीएसटी से छूट दी गई है। यह राहत विशेष रूप से एमएसएमई हीरा निर्यातकों के लिए है, जिससे उनकी पूंजी अटकेगी नहीं और सूरत का वैश्विक व्यापार केंद्र के रूप में दर्जा मजबूत होगा। जीएसटी दरों में यह तर्कसंगत कमी गुजरात के ग्रामीण और औद्योगिक दोनों क्षेत्रों के लिए समान रूप से लाभकारी है। इससे रोजगार, निर्यात और उपभोग सभी में वृद्धि होगी। कम कर दरों से जहां उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, वहीं राज्य के पारंपरिक उद्योगों और बड़े उत्पादन क्षेत्रों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी। ये सुधार गुजरात को समावेशी विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की दिशा में आगे ले जाएंगे।-(PIB)