केंद्र सरकार ने अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों के तहत टैक्स स्लैब को चार से घटाकर केवल दो (5% और 18%) कर दिया है। सरकार के इस कदम को पूरे देश में ‘जीएसटी बचत उत्सव’ के रूप में मनाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश राज्य कर विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर डॉ. श्याम सुंदर पाठक ने इन सुधारों को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे मध्यम वर्ग को राहत, कर अनुपालन में सुधार और जीवन स्तर में बढ़ोतरी होगी।
डॉ. पाठक ने कहा कि नेक्स्ट-जेन जीएसटी रिफॉर्म तीन बड़े लाभ लेकर आएंगे संरचनात्मक सुधार, कर दरों में सरलता और नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार। उनका कहना है कि रोजमर्रा की जरूरतों जैसे खाना, दवाइयां, साबुन, टूथपेस्ट और बीमा जैसी चीजें अब या तो कर-मुक्त हो गई हैं या 5% के न्यूनतम स्लैब में आ गई हैं। पहले 12% टैक्स वाली चीजें भी अब ज्यादातर 5% में शामिल हो गई हैं, जिससे उपभोक्ताओं को सीधे कम दाम का फायदा मिलेगा और उनकी बचत बढ़ेगी।
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, शुरुआती महीनों में जीएसटी कलेक्शन थोड़ा घट सकता है, लेकिन पिछले अनुभव बताते हैं कि लोगों की बचत बढ़ने से खर्च भी बढ़ेगा। अनुमान है कि करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये की बचत उपभोक्ता बाजार में खर्च करेंगे। इससे मांग बढ़ेगी, उत्पादन और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलेगी।
डॉ. पाठक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील का समर्थन किया जिसमें उन्होंने त्योहारी सीजन में स्वदेशी सामान खरीदने की बात कही है। उन्होंने कहा कि इस सुधार से खासकर एमएसएमई और मध्यम वर्गीय व्यापारी उत्साहित हैं, क्योंकि मध्यम वर्ग से जुड़े उत्पादों पर सबसे ज्यादा बचत होगी। स्वदेशी वस्तुएं खरीदने से उत्पादन में तेजी आएगी, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार होगा।
उन्होंने भरोसा जताया कि देश की जनता इस आह्वान को जरूर स्वीकार करेगी और ज्यादा से ज्यादा स्वदेशी उत्पाद खरीदकर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएगी।-(IANS)


