देश में स्वास्थ्य सेवाएं हुईं अधिक सुलभ और किफायती

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (National Statistical Office (NSO)) के 80वें दौर के ‘हाउसहोल्ड सोशल कंजम्प्शन ऑन हेल्थ’ सर्वेक्षण ने देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में आए व्यापक बदलावों की तस्वीर पेश की है। यह सर्वे बताता है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत का स्वास्थ्य तंत्र अधिक सुलभ, किफायती और प्रभावी हुआ है।

सर्वे के अनुसार, देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। आम लोगों पर इलाज का आर्थिक बोझ कम हुआ है, जिसका संकेत कम मीडियन स्वास्थ्य व्यय से मिलता है। खास बात यह है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में बाह्य रोगी (ओपीडी) सेवाओं पर मीडियन खर्च शून्य दर्ज किया गया है, जो यह दर्शाता है कि लोगों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं मुफ्त में व्यापक स्तर पर मिल रही हैं।

अस्पताल में भर्ती होने के मामलों में भी सरकारी संस्थानों की भूमिका मजबूत हुई है। आधे से अधिक मामलों में आउट-ऑफ-पॉकेट एक्सपेंडिचर (OOPE) महज 1100 रुपये के आसपास रहा, जो सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को जमीन पर साकार होता दिखाता है।

स्वास्थ्य के प्रति लोगों की जागरूकता भी बढ़ी है। 2025 में बीमार होने की रिपोर्ट करने वाले लोगों का अनुपात (PPRA) ग्रामीण क्षेत्रों में 6.8 प्रतिशत से बढ़कर 12.2 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 9.1 प्रतिशत से बढ़कर 14.9 प्रतिशत हो गया है। यह संकेत है कि अब लोग बीमारी की स्थिति में अधिक सक्रियता से इलाज करा रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का उपयोग भी बढ़ा है। बाह्य रोगी सेवाओं का उपयोग 2014 के 28 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 35 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का परिणाम है।

सरकारी स्वास्थ्य बीमा और वित्तीय योजनाओं का दायरा भी तेजी से बढ़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसका कवरेज 12.9 प्रतिशत से बढ़कर 45.5 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 8.9 प्रतिशत से बढ़कर 31.8 प्रतिशत हो गया है। खास तौर पर समाज के निचले तबकों में कम जेब खर्च यह दर्शाता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लक्षित वर्गों तक प्रभावी रूप से पहुंच रहा है।

मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार साफ दिखाई देता है। संस्थागत प्रसव ग्रामीण क्षेत्रों में 95.6 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 97.8 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो सुरक्षित मातृत्व की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।

कुल मिलाकर, एनएसओ का यह सर्वे भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में हो रहे सकारात्मक बदलावों का मजबूत प्रमाण है, जो ‘सभी के लिए सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा’ के लक्ष्य की ओर देश की निरंतर प्रगति को दर्शाता है।