आयुष को जन-जन तक पहुंचाने और सुशासन को सशक्त बनाने में हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका : प्रतापराव जाधव

आयुष मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की तीसरी बैठक नई दिल्ली में आयोजित हुई। आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव की अध्यक्षता में हुई बैठक में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने, आयुष से जुड़ी जानकारी को भारतीय भाषाओं में जनसामान्य तक पहुंचाने और हिंदी को सुशासन तथा प्रभावी जनसंपर्क का माध्यम बनाने पर जोर दिया गया।

हिंदी सलाहकार समिति को बताया महत्वपूर्ण मंच

बैठक में सांसद राहुल सिंह लोधी और ज्ञानेश्वर पाटिल, आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा, समिति के सदस्य तथा मंत्रालय और उसके अधीनस्थ संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। प्रतापराव जाधव ने कहा कि हिंदी सलाहकार समिति केवल एक औपचारिक समिति नहीं है, बल्कि मंत्रालय में राजभाषा हिंदी के प्रयोग और प्रचार-प्रसार को सुदृढ़ करने तथा हिंदी को जनकल्याण और जनसंचार का प्रभावी माध्यम बनाने का महत्वपूर्ण मंच है।

विकसित भारत के संकल्प में भारतीय भाषाओं की भूमिका

प्रतापराव जाधव ने कहा कि देश ‘विकसित भारत@2047’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रयोग पर विशेष बल दिया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रधानमंत्री द्वारा हिंदी के निरंतर प्रयोग से वैश्विक स्तर पर हिंदी के प्रति सम्मान और स्वीकार्यता को नई ऊंचाई मिली है।

सरकारी कामकाज में हिंदी को बढ़ावा देने पर जोर

जाधव ने कहा कि वह स्वयं यह सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं कि उनके कार्यालय में अधिक से अधिक आधिकारिक कार्य हिंदी में किए जाएं। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से आग्रह किया कि हिंदी में काम करने को केवल औपचारिक या संवैधानिक दायित्व न माना जाए। इसे सुशासन, पारदर्शिता और प्रभावी जनसंपर्क के माध्यम के रूप में अपनाते हुए दैनिक कार्यों का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

आयुष ज्ञान परंपरा को भारतीय भाषाओं में पहुंचाने की जरूरत

उन्होंने कहा कि आयुष भारत की समृद्ध और प्राचीन ज्ञान परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी जैसी आयुष चिकित्सा पद्धतियां देश के साथ-साथ दुनियाभर में लोकप्रिय हो रही हैं। ऐसे में आयुष से संबंधित ज्ञान को लोगों की अपनी भाषाओं में उपलब्ध कराना इसकी स्वीकार्यता और पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

वेबसाइट और सोशल मीडिया में हिंदी के प्रयोग पर जोर

आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने मंत्रालय में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आधिकारिक कामकाज, पत्राचार, प्रकाशन, वेबसाइट, सोशल मीडिया और जनसंपर्क गतिविधियों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। अधिकारियों और कर्मचारियों को हिंदी के प्रयोग के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से प्रोत्साहित किया जा रहा है।

वैज्ञानिक साहित्य और योजनाओं को भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने पर चर्चा

बैठक में आयुष से संबंधित ज्ञान, अनुसंधान, वैज्ञानिक साहित्य, जनकल्याणकारी योजनाओं और मंत्रालय की उपलब्धियों को हिंदी सहित अन्य भारतीय भाषाओं में व्यापक रूप से उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर चर्चा हुई। इस दौरान भारतीय भाषाओं के माध्यम से आयुष की जानकारी को अधिक सुलभ बनाकर इसकी पहुंच जनसामान्य तक और प्रभावी तरीके से बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श किया गया।

‘अप्रतिम आयुष’ का विमोचन

बैठक के दौरान आयुष मंत्रालय की हिंदी गृह पत्रिका ‘अप्रतिम आयुष’ का भी विमोचन किया गया। मंत्रालय के राजभाषा विभाग की उपनिदेशक पूर्णिमा बोस ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया, जबकि सहायक निदेशक डॉ. प्रकाश कुमार ने बैठक का संचालन किया।

समिति के सदस्य और अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में गैर-सरकारी सदस्य मार्कण्डेय राय, थिनलेस दोरजे, सुनील मेहरू, रम्या कृष्ण कनापार्थी और हेमचंद्र वैद्य भी उपस्थित रहे। बैठक में हिंदी के प्रभावी प्रयोग के साथ आयुष की जानकारी को भारतीय भाषाओं के जरिए व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने को लेकर विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। (इनपुट: पीआईबी)