डिजिलॉकर को इसके प्रशासनिक ढांचे में एकीकृत करने के लिए ICG और MeitY ने NeGD के साथ की साझेदारी

भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने डिजिलॉकर को इसके प्रशासनिक ढांचे में एकीकृत करने के लिए इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग (NeGD) के साथ साझेदारी की है। यह साझेदारी आईसीजी कर्मियों के सेवा अभिलेखों को जारी करने, उन तक पहुंचने और सत्यापित करने के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। इससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अधिक दक्षता, पारदर्शिता और डेटा प्रामाणिकता आएगी।

इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय ने कल बुधवार को इसकी जानकारी दी, डिजिलॉकर को भारतीय तटरक्षक बल के साथ एकीकृत करने के लिए समझौता किया गया है। इस एमओयू पर 27 अक्टूबर, 2025 को नई दिल्ली स्थित आईसीजी मुख्यालय में एनईजीडी के अध्यक्ष एवं सीईओ नंद कुमारम आईएएस और उप महानिदेशक (एचआरडी) आईजी ज्योतिंद्र सिंह ने हस्ताक्षर किए।

इस अवसर पर नंद कुमारम ने कहा, “एनईजीडी और भारतीय तटरक्षक बल के बीच समझौता रक्षा सेवाओं में व्यापक डिजिटल परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह प्रौद्योगिकी के माध्यम से संस्थानों को सशक्त बनाने, डेटा सुरक्षा को मजबूत करने, परिचालन दक्षता और भारत के समुद्री रक्षा कर्मियों के लिए सेवा वितरण के भारत सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप है।”

डिजिलॉकर के विश्वसनीय डिजिटल ढांचे को अपनाकर, आईसीजी कागज़ रहित शासन और सुरक्षित डिजिटल सेवा वितरण के लिए अपनी प्रतिबद्धता को मज़बूत करता है। यह रणनीतिक सहयोग डिजिटल दस्तावेज़ विनिमय प्लेटफ़ॉर्म स्थापित करेगा, जो डिजिलॉकर के माध्यम से सेवा अभिलेखों और अन्य दस्तावेज़ों को जारी करने और सत्यापित करने में सक्षम बनाएगा।

अधिकृत तटरक्षक अभिलेख कार्यालयों और इकाइयों को आईसीजी कर्मियों से संबंधित व्यापार और अनुभव प्रमाण पत्र, सेवा अभिलेख, प्रशिक्षण प्रमाण पत्र और डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित और सत्यापन योग्य अभिलेख जैसे अन्य दस्तावेज़ जारी करने के लिए शामिल किया जाएगा।

डिजिलॉकर के साथ एकीकरण आईसीजी के भीतर विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करेगा। भर्ती के दौरान, उम्मीदवारों के शैक्षणिक दस्तावेज़ सत्यापन डिजिटल रूप से किए जाएंगे, जिससे पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। यह एकीकरण भौतिक कागजी कार्रवाई को समाप्त करेगा, डेटा अखंडता सुनिश्चित करेगा और किसी भी समय, कहीं भी प्रमाणित डिजिटल रिकॉर्ड तक अधिकृत पहुंच को सक्षम करेगा।

यह पहल भविष्य में कल्याण और पेंशन कार्यप्रवाह को शुरू करने में भी सहायता करेगी। इससे आईसीजी के लिए एकीकृत और सुरक्षित डिजिटल दस्तावेज़ीकरण पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण होगा। 

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