भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने आज गुरुवार को कर्नाटक के मदिकेरी में नये जहाज निर्माण, स्वदेशीकरण और आईटी सम्मेलन की मेजबानी की, जो देश की समुद्री क्षमताओं को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि ने अपने उद्घाटन भाषण में स्वदेशी डिजाइन, मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचे और लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं के माध्यम से जहाज निर्माण में आत्मनिर्भरता के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस आयोजन का एक प्रमुख आकर्षण भारतीय तटरक्षक बल और कोयंबटूर जिला लघु उद्योग संघ एवं रक्षा नवाचार और अटल इनक्यूबेशन सेंटर के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करना था। यह साझेदारी कोयंबटूर में रक्षा नवाचार हब के माध्यम से रक्षा नवाचार इको-सिस्टम को मजबूत करने और स्वदेशीकरण के प्रयासों में तेजी लाने का प्रयास करती है।
वहीं, महानिदेशक परमेश शिवमणि ने भारतीय तटरक्षक बल की परिचालन तत्परता को बढ़ावा देने में भारतीय शिपयार्ड और उपकरण निर्माताओं के दृढ़ समर्थन की सराहना की। उन्होंने 200वें स्वदेश निर्मित पोत (चौथे प्रदूषण नियंत्रण जहाज) की सफल प्रगति पर भी प्रकाश डाला, जो वर्तमान में समुद्री परीक्षणों से गुजर रहा है। उन्होंने इसे भारतीय तटरक्षक बल टेक्नोक्रेट्स की तकनीकी दक्षता और इंजीनियरिंग उत्कृष्टता का प्रतीक बताया।
उन्होंने प्रोजेक्ट डिजिटल कोस्ट गार्ड की प्रगति के बारे में विस्तार से बताया, जो सभी भारतीय तटरक्षक बल इकाइयों के लिए एक सुरक्षित, मापनीय और लचीला डिजिटल बैकबोन बनाने के लिए एक दीर्घकालिक पहल है। शिवमणि ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल विस्तार को मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचे के साथ जोड़ा जाना चाहिए।
सम्मेलन के दौरान उन्होंने तीन ई-बुक ‘हिस्ट्री ऑफ शिपबिल्डिंग इन द इंडियन कोस्ट गार्ड’ का टीज़र; भारतीय तटरक्षक बल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए रोडमैप और भारतीय तटरक्षक बल साइबर संकट प्रबंधन योजना-2025 का विमोचन भी किया। (इनपुट-पीआईबी)


