मिशन कर्मयोगी के तहत संचालित iGOT कर्मयोगी पोर्टल ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस पोर्टल से अब देशभर में 1 करोड़ से अधिक सरकारी कर्मचारी जुड़ चुके हैं। यह जानकारी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज बुधवार को दी। गौरतलब है कि जनवरी 2023 में इस पोर्टल पर केवल 3 लाख उपयोगकर्ता थे, और अब यह संख्या 30 गुना बढ़कर 1 करोड़ को पार कर गई है। यह डिजिटल शासन के क्षेत्र में भारत के तेजी से हो रहे परिवर्तन और नागरिक-केंद्रित नौकरशाही के निर्माण की दिशा में केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
iGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म का प्रबंधन ‘कर्मयोगी भारत’ संस्था द्वारा किया जाता है और इस पर अब 16 भारतीय भाषाओं में 2,400 से अधिक पाठ्यक्रम मौजूद हैं। इन पाठ्यक्रमों को 200 से अधिक कंटेंट पार्टनर्स-जैसे केंद्रीय और राज्य सरकार के विभाग, सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थान (CSTIs), सामाजिक संस्थाएं, शैक्षणिक संस्थान और निजी विशेषज्ञों के सहयोग से तैयार किया गया है। ये सभी कोर्स कर्मयोगी कॉम्पिटेंसी मॉडल (KCM) के अनुरूप बनाए गए हैं, जो भारतीय परंपरा और मिशन कर्मयोगी के सिद्धांतों पर आधारित है।अब तक जारी किए गए 3.1 करोड़ से अधिक लर्निंग सर्टिफिकेट और 3.8 करोड़ घंटे से ज्यादा का कुल अध्ययन समय यह दिखाता है कि यह मंच कितनी तीव्र गति से उपयोग में लाया जा रहा है। पोर्टल के 60% से अधिक उपयोगकर्ता राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारी हैं, जबकि शेष केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों से हैं। उपयोगकर्ता संख्या के मामले में बिहार, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश शीर्ष पांच राज्य हैं।
राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय सीखने के कार्यक्रमों ने भी इस मंच की लोकप्रियता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। अक्टूबर 2024 में आयोजित पहले कर्मयोगी सप्ताह (राष्ट्रीय लर्निंग वीक) के दौरान 32 लाख से अधिक कोर्स पूरे किए गए और 38 लाख घंटे का अध्ययन हुआ। प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किया गया यह कार्यक्रम ‘विकसित भारत@2047’ के सपने को साकार करने के लिए सिविल सेवकों को तैयार करने का प्रयास है। इस प्रेरणा से महाराष्ट्र, राजस्थान, और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह जैसे कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने-अपने राज्य स्तरीय लर्निंग वीक शुरू किए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर क्षमता निर्माण को बढ़ावा मिला है।
वहीं iGOT कर्मयोगी अब क्षेत्रीय भाषाओं में और अधिक कोर्स उपलब्ध कराएगा, कंटेंट की गुणवत्ता को बेहतर बनाएगा, नए ज्ञान साझेदारों के साथ सहयोग करेगा, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा नई तकनीकों के जरिए उपयोगकर्ता अनुभव को और समृद्ध करेगा। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के रूप में यह मंच न केवल स्केलेबल और सुरक्षित है, बल्कि हर स्तर के सरकारी कर्मचारियों को निरंतर सीखने के अवसर देने के लिए समावेशी भी है। खास बात यह है कि अब कैरेबियाई देशों सहित कई अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रों ने भी iGOT कर्मयोगी फ्रेमवर्क को अपनाने में रुचि दिखाई है, जो डिजिटल शासन में भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को दर्शाता है।-(PIB)


