IISF 2025: भारत की वैज्ञानिक प्रगति अब दुनिया के लिए बन रही है मॉडल

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि भारत अब पारंपरिक अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर एक नवाचार-आधारित राष्ट्र बन चुका है और तकनीक-आधारित विकास में वैश्विक रुझान तय कर रहा है। वे इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (IISF) में एक विशेष सत्र को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि भारत आज बायोटेक्नोलॉजी, न्यूक्लियर इनोवेशन, रीजेनेरेटिव साइंसेज़ और अगली पीढ़ी की स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहा है। पिछले दस वर्षों में देश की वैज्ञानिक सोच, नीति निर्माण और शासन व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन आया है, और अब भारत की आर्थिक प्रगति विज्ञान, तकनीक और शोध पर आधारित है।

भविष्य की रूपरेखा बताते हुए उन्होंने कहा कि स्पेस सेक्टर वह क्षेत्र होगा, जिसमें भारत आने वाले वर्षों में दुनिया को चौंकाएगा। उन्होंने अनुमान जताया कि अगले 15–20 वर्षों में एक भारतीय चंद्रमा पर कदम रखेगा।

उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले समय में भारत में तेजी से परिवर्तन लाएगी, बशर्ते इसे जिम्मेदारी के साथ अपनाया जाए। युवाओं को उन्होंने सलाह दी कि वे जोखिम लेने से न डरें, उद्योग के साथ साझेदारी बढ़ाएं और सरकार द्वारा दिए जा रहे अवसरों का पूरा लाभ उठाएं।

डॉ. सिंह ने नए राष्ट्रीय R&D फंड को परिवर्तनकारी कदम बताया, जो उच्च जोखिम और उच्च प्रभाव वाले शोध का समर्थन करेगा। यह फंड अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निजी उद्योग को मजबूत बनाने में मदद करेगा, जो पहले उनके लिए लगभग बंद थे।

उन्होंने स्पेस सेक्टर में खुलेपन का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले श्रीहरिकोटा जैसी जगहों में मीडिया तक को प्रवेश नहीं मिलता था, लेकिन अब वहां से लगभग 400 स्टार्टअप उभर चुके हैं। उन्होंने कहा कि भारत स्पेस टेक्नोलॉजी को कृषि, स्वास्थ्य, पेयजल और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी प्रभावी रूप से लागू कर रहा है।

न्यूक्लियर सेक्टर में भी उन्होंने कहा कि आज नवाचार सीधे नागरिकों के जीवन को बेहतर बना रहे हैं—जैसे कैंसर के उपचार नेटवर्क और पानी शोधन तकनीकें। ये उदाहरण दिखाते हैं कि कैसे रणनीतिक तकनीकें जीवन को आसान बना सकती हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की तकनीकी प्रगति “अवसरों के लोकतांत्रिक विस्तार” से भी जुड़ी है, जहां छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के युवा अब बड़े शहरों के युवाओं के बराबर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। UPSC जैसे परीक्षाओं में नए क्षेत्रों से आ रहे टॉपर्स इसका प्रमाण हैं।

अंत में उन्होंने कहा कि नवाचार की असली कसौटी स्थिरता है—विचार तभी सफल माने जाएंगे जब वे ऐसे उद्यम बनें जो स्वयं टिकाऊ हों और बाज़ार में अपनी जगह बना सकें।

-(इनपुटःएजेंसी)

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