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भारत के आईटी सेक्टर पर एआई का असर, कम लागत और बेहतर परिणाम की बढ़ी मांग

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल से भारत के आईटी सेवा क्षेत्र में कारोबार का तरीका तेजी से बदल रहा है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस, विप्रो, एचसीएलटेक और कॉग्निजेंट जैसी कंपनियां अब ऐसे कॉन्ट्रैक्ट पर अधिक जोर दे रही हैं, जिनमें भुगतान काम के घंटों के बजाय हासिल किए गए परिणामों से जुड़ा हो।

ग्राहक एआई से बढ़ी उत्पादकता का लाभ उठाते हुए कम कीमत में अधिक काम, तेज डिलीवरी और बेहतर परिणाम की मांग कर रहे हैं। इससे भारतीय आईटी कंपनियों पर लागत और मुनाफे को लेकर दबाव बढ़ा है।

TCS के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के. कृतिवासन के अनुसार, कंपनी के वित्त, मानव संसाधन और अन्य बिजनेस सर्विसेज से जुड़े करीब 80 प्रतिशत कॉन्ट्रैक्ट अब प्रदर्शन आधारित हैं। यह आंकड़ा 2023 के अंत में एआई के मुख्यधारा में आने के बाद दोगुना हुआ है।

कॉग्निजेंट ने भी कहा कि एआई के कारण ग्राहक अब अधिक मूल्य और मापने योग्य परिणाम चाहते हैं। वहीं, कुछ कंपनियों को ग्राहकों द्वारा एआई के जरिए कई काम खुद करने के कारण अपना कारोबार गंवाना पड़ रहा है। नई तकनीक को लेकर अनिश्चितता के चलते कॉन्ट्रैक्ट की अवधि भी छोटी हो रही है।

ग्राहकों की बढ़ी मांग

पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के सीईओ संदीप कालरा ने बताया कि ग्राहक समान काम के लिए 25 से 30 प्रतिशत कम कीमत के साथ-साथ तेज डिलीवरी और अधिक उत्पादकता की मांग कर रहे हैं।

एआई के कारण बड़े कर्मचारियों वाले आईटी दिग्गजों का पारंपरिक फायदा भी कम हो रहा है। इससे छोटी और मध्यम आकार की आईटी कंपनियों के लिए बड़े कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के अवसर बढ़े हैं।

नतीजों पर आधारित हो रहा भुगतान

कई नए कॉन्ट्रैक्ट में आईटी कंपनियों को भुगतान तभी मिलता है जब वे तय दक्षता या कारोबारी परिणाम हासिल करती हैं। उदाहरण के लिए, HCLTech के एक क्लाउड प्रबंधन समझौते में पहले वर्ष भुगतान नहीं किया जाना था, जबकि बाद के भुगतान दक्षता में सुधार और तय कारोबारी परिणामों से जुड़े थे।

कॉग्निजेंट और डेमलर ट्रक के बीच एक समझौते में भी एआई से होने वाली लागत बचत को कंपनी और ग्राहक के बीच साझा करने का प्रावधान था।

बड़ी कंपनियों के सामने नई चुनौती

टेक महिंद्रा के सीईओ मोहित जोशी ने कहा कि प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई है और कुछ कंपनियां भविष्य में 70 से 80 प्रतिशत तक उत्पादकता बढ़ने का अनुमान लगाकर ऐसे सौदे कर रही हैं, जिनमें जोखिम अधिक है।

इंफोसिस ने भी हाल में कहा था कि उसने ऐसे कॉन्ट्रैक्ट से दूरी बनाई जो उसके लिए आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं थे।

TCS के अनुसार, एआई से राजस्व पर पड़ने वाले दबाव को फिलहाल नए कारोबार से संतुलित किया जा रहा है। हालांकि, कंपनी की भविष्य की वृद्धि इस बात पर निर्भर करेगी कि वह एआई के कारण होने वाली राजस्व कमी की भरपाई कितनी तेजी से कर पाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एआई के दौर में भारतीय आईटी कंपनियों के लिए केवल बड़ी संख्या में कर्मचारियों का होना पर्याप्त नहीं रहेगा। कंपनियों को तकनीकी विशेषज्ञता, तेज डिलीवरी, एआई क्षमताओं और मापने योग्य कारोबारी परिणामों पर अधिक ध्यान देना होगा।

-(रॉयटर्स)