SEBI के कदमों का असर, F&O में रिटेल निवेशकों का नुकसान 18% घटकर ₹91,685 करोड़ हुआ

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा उठाए गए नियामकीय कदमों से वित्त वर्ष 2025-26 में इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में खुदरा निवेशकों का कुल नुकसान 18 प्रतिशत घटकर 91,685 करोड़ रुपये रह गया। सरकार ने मंगलवार को राज्यसभा में यह जानकारी दी।

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक लिखित जवाब में बताया कि नवंबर 2024 से लागू किए गए नियामकीय उपायों के बाद इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में भाग लेने वाले व्यक्तिगत निवेशकों की संख्या और ट्रेडिंग गतिविधियों में कमी देखी गई है।

मंत्री के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में व्यक्तिगत निवेशकों का शुद्ध नुकसान 1,11,788 करोड़ रुपये था, जो FY26 में घटकर 91,685 करोड़ रुपये रह गया।

F&O सेगमेंट में विशिष्ट खुदरा निवेशकों की संख्या भी करीब 20 प्रतिशत घटकर 78.6 लाख रह गई, जो FY25 में 98.1 लाख थी।

चौधरी ने कहा कि SEBI के नियामकीय उपायों के बाद व्यक्तिगत निवेशकों की संख्या 98.10 लाख से घटकर 78.60 लाख और उनका शुद्ध नुकसान 1,11,788 करोड़ रुपये से घटकर 91,685 करोड़ रुपये हो गया।

हालांकि, कुल नुकसान में कमी के बावजूद प्रति निवेशक औसत नुकसान बढ़कर 1,16,654 रुपये हो गया, जो एक साल पहले 1,13,913 रुपये था।

इक्विटी डेरिवेटिव्स में कुल कारोबार भी कम हुआ। FY26 में यह घटकर 202 लाख करोड़ रुपये रह गया, जबकि FY25 में यह 213 लाख करोड़ रुपये था।

SEBI द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों में साप्ताहिक और मासिक इंडेक्स डेरिवेटिव्स उत्पादों का युक्तिकरण, इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइज बढ़ाना, ऑप्शन एक्सपायरी के दिनों में टेल-रिस्क कवरेज बढ़ाना और ऑप्शन खरीदारों से प्रीमियम की अग्रिम वसूली शामिल हैं।

इसके अलावा, एक्सपायरी के दिन कैलेंडर स्प्रेड ट्रीटमेंट को हटाने और पोजिशन लिमिट की इंट्राडे निगरानी जैसे उपाय भी लागू किए गए।

मई 2025 में बाजार नियामक ने सभी एक्सचेंजों पर एक्सपायरी दिनों को सुव्यवस्थित करने तथा F&O सेगमेंट में जोखिम निगरानी और खुलासे को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त उपाय पेश किए थे।

इस बीच, F&O कारोबार से मिलने वाला सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) भी तेजी से बढ़ा। यह FY25 के 7,893 करोड़ रुपये से बढ़कर FY26 में 27,695 करोड़ रुपये हो गया।

(इनपुट-IANS)