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रोजगार, कौशल, खेल और स्वास्थ्य के क्षेत्र में युवाओं के लिए बढ़े अवसर

पिछले वर्षों में युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास, उद्यमिता, खेल और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में विभिन्न सरकारी पहलों के माध्यम से अवसरों का विस्तार हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बेरोजगारी दर में कमी के साथ कौशल प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप, स्टार्टअप और खेल के क्षेत्र में भागीदारी बढ़ी है।

रोजगार और कौशल विकास

भारत में बेरोजगारी दर 2014 के 7.71 प्रतिशत से घटकर 2025 में 4.2 प्रतिशत रह गई है।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के तहत 2015 से अब तक चार चरणों में 1.64 करोड़ से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। योजना में AI, रोबोटिक्स, ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन एनर्जी और अन्य उभरते क्षेत्रों में उद्योग से जुड़े प्रशिक्षण तथा ऑन-द-जॉब अनुभव शामिल हैं।

जन शिक्षण संस्थान के तहत मार्च 2026 तक 36.48 लाख लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है।

वहीं, नेशनल अप्रेंटिसशिप प्रमोशन स्कीम (NAPS) के तहत मार्च 2026 तक 54.41 लाख से अधिक अप्रेंटिस जुड़े हैं।

स्टार्टअप और इंटर्नशिप

भारत में स्टार्टअप की संख्या 2014 से पहले लगभग 350 थी, जो अगस्त 2026 तक बढ़कर 2.47 लाख से अधिक हो गई है। इसके साथ भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है।

प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के तहत 12 अगस्त 2026 तक 31 क्षेत्रों में 1,64,902 इंटर्नशिप अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।

अक्टूबर 2025 में शुरू की गई PM-SETU योजना के लिए लगभग 60,000 करोड़ रुपये का अनुमानित परिव्यय रखा गया है। इसके तहत 1,000 सरकारी ITI को 200 हब और 800 स्पोक के माध्यम से उन्नत करने की योजना है। इसमें उद्योग की भागीदारी और श्रम बाजार की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम पर जोर दिया गया है।

2014 से 2025 के बीच ITI की संख्या 9,977 से बढ़कर 14,688 हो गई। इसी अवधि में ITI में नामांकन 9.5 लाख से बढ़कर 14.7 लाख हुआ। नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट 25 से बढ़कर 33 और इंस्टीट्यूट फॉर ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स 11 से बढ़कर 120 हो गए।

खेल और फिटनेस

भारत में स्थानीय स्तर पर प्रतिभा पहचान से लेकर उच्च प्रदर्शन प्रशिक्षण तक एक व्यवस्थित खेल व्यवस्था विकसित की जा रही है। कोचिंग, बुनियादी ढांचे, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के माध्यम से खेल को करियर के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है।

खेलो इंडिया के तहत 3,176 करोड़ रुपये की 349 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा 1,067 खेलो इंडिया केंद्र और 267 अकादमियां स्थापित की गई हैं। योजना के तहत 2,745 खिलाड़ियों को भी सहायता मिल रही है।

2018 से अब तक खेलो इंडिया के युवा, विश्वविद्यालय, शीतकालीन, पैरा, बीच, जल क्रीड़ा और जनजातीय खेलों में 63,000 से अधिक खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया है।

उच्च प्रदर्शन वाले खिलाड़ियों के लिए टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) के तहत 51 कोर, 52 पैरा कोर और 130 डेवलपमेंट खिलाड़ियों को सहायता दी जा रही है। कोर और डेवलपमेंट खिलाड़ियों को क्रमशः 50,000 रुपये और 25,000 रुपये मासिक स्टाइपेंड मिलता है।

2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए संशोधित खेलो इंडिया योजना और राष्ट्रीय खेल महासंघों को बढ़ी सहायता का संयुक्त परिव्यय 36,441 करोड़ रुपये है।

स्वास्थ्य और कल्याण

युवा सशक्तीकरण के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं पर भी जोर दिया जा रहा है।

किशोर स्वास्थ्य के क्षेत्र में Adolescent Friendly Health Clinics (AFHCs) की संख्या 2014-15 में 6,619 से बढ़कर 2021-22 में 7,203 हुई। इसी अवधि में क्लीनिकल और काउंसलिंग सेवाएं प्राप्त करने वाले किशोरों की संख्या 39 लाख से बढ़कर 82 लाख हो गई। 2024-25 में नवंबर 2024 तक 97.67 लाख युवाओं ने इन क्लीनिकों में पंजीकरण कराया।

मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए Tele-MANAS ने 12 अगस्त 2026 तक 53 सेल के माध्यम से 43.70 लाख से अधिक कॉल संभाली हैं। इसके लिए 23 मेंटरिंग संस्थान और पांच क्षेत्रीय समन्वय केंद्र भी काम कर रहे हैं।

नशा मुक्ति अभियान

नशा मुक्त भारत अभियान के तहत 12 अगस्त 2026 तक 30.05 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई गई है, जिनमें 11.86 करोड़ युवा शामिल हैं।

शैक्षणिक संस्थानों में 28.56 लाख से अधिक गतिविधियां आयोजित की गई हैं, जबकि 28.29 लाख से अधिक लोगों को उपचार और पुनर्वास सहायता प्रदान की गई है।

एक दशक में युवाओं के लिए बढ़े अवसर

पिछले 12 वर्षों में रोजगार, शिक्षा, कौशल, उद्यमिता, खेल और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में किए गए बहु-क्षेत्रीय निवेश से युवाओं के लिए अवसरों का विस्तार हुआ है। अधिक युवा शिक्षा से जुड़ रहे हैं, उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कौशल हासिल कर रहे हैं, औपचारिक रोजगार में प्रवेश कर रहे हैं, व्यवसाय शुरू कर रहे हैं और खेलों में उच्च स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।

यह बदलाव केवल अवसरों तक पहुंच से आगे बढ़कर नेतृत्व और भागीदारी की दिशा में है। नीतियों, संस्थानों और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने युवाओं के लिए आधार तैयार किया है, जबकि ‘अमृत पीढ़ी’ को विकसित भारत@2047 की दिशा में आगे बढ़ाने की भूमिका निभा रही है।

-PIB