प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (पीएमडीडीकेवाई) के कार्यान्वयन का पहला वर्ष पूरा होने पर बिहार के गया जिले को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए पहला, राजस्थान के नागौर को दूसरा और मध्य प्रदेश के उमरिया जिले को तीसरा स्थान मिला है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि योजना की सफलता का अंतिम पैमाना किसानों के जीवन में आने वाला सार्थक और मापने योग्य बदलाव होगा। उन्होंने योजना के दूसरे वर्ष में परिणाम आधारित कार्यान्वयन, समन्वय और जमीनी स्तर पर तेजी से काम करने का आह्वान किया।
पहले वर्ष में मजबूत नींव, अब ठोस परिणाम पर जोर
नई दिल्ली के राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर, पूसा स्थित भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम सभागार में आयोजित कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि योजना के पहले वर्ष में मजबूत नींव तैयार करने पर ध्यान दिया गया। अब दूसरे वर्ष में कृषि क्षेत्र में स्पष्ट और मापने योग्य परिणाम हासिल करने पर फोकस होना चाहिए। उन्होंने कृषि उत्पादकता बढ़ाने, फसल सघनता में सुधार, सिंचाई और जल प्रबंधन मजबूत करने, कृषि ऋण की पहुंच आसान बनाने तथा किसानों की आय बढ़ाने को प्राथमिकता देने की बात कही।
किसानों के जीवन में बदलाव ही योजना की असली सफलता
कृषि मंत्री ने कहा कि पीएमडीडीकेवाई की सफलता का वास्तविक आकलन इस बात से होगा कि इससे किसानों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव आया। उन्होंने सभी हितधारकों से बेहतर समन्वय, तेज कार्यान्वयन और कृषि परिणामों में मापने योग्य सुधार सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि किसानों की सतत आय बढ़ाना योजना के केंद्र में होना चाहिए।
100 जिलों को ‘धन-धान्य’ बनाने का लक्ष्य
केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, वैज्ञानिक संस्थानों और किसानों के साथ मिलकर जिला कार्य योजनाओं को ठोस परिणामों में बदलने की प्रतिबद्धता दोहराई। दूसरे वर्ष में सफल पहलों को अधिक व्यापक स्तर पर लागू करने और सभी 100 चिन्हित जिलों के प्रदर्शन में सुधार पर जोर रहेगा। लक्ष्य इन जिलों को वास्तविक अर्थों में ‘धन-धान्य’ यानी कृषि उत्पादन और समृद्धि से भरपूर बनाना है।
22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक ‘खेत बचाओ अभियान’
शिवराज सिंह चौहान ने 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक सभी राज्यों में चलने वाले ‘खेत बचाओ अभियान’ में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। अभियान का उद्देश्य उर्वरकों के संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग के जरिए मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। उन्होंने मृदा की उर्वरता बनाए रखने, पर्यावरण की रक्षा और प्राकृतिक संसाधनों को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने के लिए टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाने पर जोर दिया।
121 संकेतकों से जिलों के प्रदर्शन की निगरानी
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव ने योजना के जिला-केंद्रित दृष्टिकोण की जानकारी दी। इसके तहत प्रत्येक जिला अपनी मिट्टी, वर्षा, फसल पैटर्न, जल उपलब्धता, बुनियादी ढांचे और किसानों की जरूरतों के आधार पर कार्ययोजना तैयार करता है। पीएमडीडीकेवाई के तहत 121 संकेतकों के आधार पर जिलों के प्रदर्शन की निगरानी की जाती है। समर्पित डैशबोर्ड पर मासिक रैंकिंग से पारदर्शिता के साथ जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया जा रहा है।
गया, नागौर और उमरिया को मिला सम्मान
योजना के तहत उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बिहार के गया जिले को पहला स्थान मिला। राजस्थान का नागौर जिला दूसरे और मध्य प्रदेश का उमरिया जिला तीसरे स्थान पर रहा। कार्यक्रम में छह प्रमुख उद्देश्यों के तहत उल्लेखनीय कार्य करने वाले 18 जिलों को भी सम्मानित किया गया।
कृषि उत्पादकता और फसल विविधीकरण में जिलों का प्रदर्शन
कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर, उत्तर प्रदेश के चित्रकूट और सिक्किम के गेजिंग को सम्मानित किया गया। फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के महोबा, मध्य प्रदेश के दिंडोरी और उत्तराखंड के चमोली को मान्यता मिली।
भंडारण और सिंचाई में भी उल्लेखनीय काम
फसल कटाई के बाद भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ और सीधी तथा छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा को सम्मानित किया गया। सिंचाई अवसंरचना में सुधार के लिए जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़, गुजरात के दाहोद और छोटा उदयपुर को सम्मान मिला।
कृषि ऋण और बेहतर सेवा वितरण पर भी जोर
अल्पकालिक और दीर्घकालिक कृषि ऋण तक पहुंच बढ़ाने के लिए तेलंगाना के नारायणपेट, उत्तर प्रदेश के जालौन और आंध्र प्रदेश के श्री सत्य साईं जिले को सम्मानित किया गया। बेहतर शासन और सेवा वितरण के लिए राजस्थान के नागौर, तेलंगाना के कुरनूल, गुजरात के कच्छ और कर्नाटक के हावेरी को सम्मान दिया गया।
स्थानीय जरूरतों के अनुसार नवाचार को बढ़ावा
कार्यक्रम में पीएमडीडीकेवाई के तहत तीन जिलों ने अपनी उल्लेखनीय पहल और अनुभव साझा किए। गढ़चिरोली ने जल संरक्षण और सूखा प्रबंधन, अल्लूरी सीताराम राजू जिले ने उच्च मूल्य वाली बागवानी और बांका ने लिलावरन प्राकृतिक कृषि भूमि पुनरुद्धार मॉडल प्रस्तुत किया। इन पहलों से स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप समाधान, विभागीय समन्वय और किसानों की भागीदारी की उपयोगिता सामने आई।
2025 में शुरू हुई थी पीएमडीडीकेवाई
केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित पीएम धन-धान्य कृषि योजना को 11 अक्टूबर 2025 को औपचारिक रूप से शुरू किया गया था। योजना में कम उत्पादकता, कम फसल सघनता और कम कृषि ऋण वितरण वाले 100 जिलों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाना, फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना, पंचायत और ब्लॉक स्तर पर फसल कटाई के बाद भंडारण बढ़ाना, सिंचाई सुविधाओं में सुधार करना तथा दीर्घकालिक और अल्पकालिक कृषि ऋण की उपलब्धता आसान बनाना है।
11 केंद्रीय मंत्रालयों की योजनाएं एकीकृत
पीएमडीडीकेवाई के तहत 11 मंत्रालयों और विभागों की 36 केंद्रीय योजनाओं के साथ संबंधित राज्य सरकारों की योजनाओं को एक समन्वित ढांचे में जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य प्रत्येक जिले की कृषि संबंधी विशिष्ट प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और किसानों तक उनका लाभ पहुंचाना है। (इनपुट: पीआईबी)


