भारत सरकार और एशियाई विकास बैंक (ADB) ने चेन्नई में जल आपूर्ति और स्वच्छता के बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और विस्तार के लिए 230 मिलियन अमेरिकी डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस ऋण को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आर्थिक मामलों के विभाग में ADB एवं जापान मामलों के संयुक्त सचिव बलदेव पुरुषार्थ के मार्गदर्शन में पूरी हुई।
समझौते पर भारत सरकार की ओर से वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के उप सचिव सौरभ सिंह और ADB की ओर से इंडिया रेजिडेंट मिशन की कंट्री डायरेक्टर मियो ओका ने हस्ताक्षर किए।
जलवायु-अनुकूल जल और सीवरेज व्यवस्था
चेन्नई जलवायु-अनुकूल जल सुरक्षा और सीवरेज परियोजना का उद्देश्य पूरे शहर में सुरक्षित और भरोसेमंद जल आपूर्ति तथा बेहतर स्वच्छता सेवाएं उपलब्ध कराना है।
परियोजना से चेन्नई को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अधिक लचीला बनाने, सार्वजनिक स्वास्थ्य और जीवन स्तर में सुधार तथा एक कुशल और वित्तीय रूप से टिकाऊ शहरी जल नेटवर्क विकसित करने में मदद मिलेगी।
यह परियोजना चेन्नई में समान जल वितरण और अपशिष्ट प्रबंधन सेवाओं के विस्तार के लिए ADB द्वारा किए गए पिछले निवेशों को आगे बढ़ाती है। यह केंद्र सरकार की अटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन 2.0 (AMRUT 2.0) और अर्बन चैलेंज फंड जैसी शहरी विकास पहलों के अनुरूप है।
170 किलोमीटर से अधिक पाइपलाइन का निर्माण
परियोजना के तहत 170 किलोमीटर से अधिक जल आपूर्ति और सीवर पाइपलाइन बिछाई जाएंगी। इसके अलावा महानगरीय क्षेत्र में 7 जल पंपिंग स्टेशनों और 38 सीवेज पंपिंग स्टेशनों का उन्नयन किया जाएगा।
जल उपयोगिता से जुड़ी परिसंपत्तियों और संचालन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रदर्शन आधारित अनुबंध भी लागू किए जाएंगे।
देश का पहला व्यापक Ring-Main सिस्टम
इस परियोजना के तहत चेन्नई भारत का पहला ऐसा शहर बनेगा जहां व्यापक Ring-Main System लागू किया जाएगा।
यह एक बंद-लूप पाइपलाइन व्यवस्था होगी, जो जल का दबाव संतुलित रखने और विभिन्न सेवा क्षेत्रों में पानी के अधिक कुशल वितरण में मदद करेगी। इससे जल आपूर्ति की विश्वसनीयता, समान वितरण और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी।
डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल
ADB स्थानीय जल और स्वच्छता सेवाओं के डिजिटल रूपांतरण में भी सहयोग करेगा। इसमें रियल-टाइम मॉनिटरिंग, डेटा आधारित संचालन संबंधी निर्णय और उपभोक्ताओं की शिकायतों एवं जरूरतों पर त्वरित प्रतिक्रिया देने की व्यवस्था शामिल होगी।
परियोजना में उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल सीवर लाइनों की खतरनाक मैनुअल जांच को समाप्त करने, रुकावटों की तेजी और सुरक्षित तरीके से पहचान करने तथा स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए भी किया जाएगा।
इसके साथ ही ग्रेटर चेन्नई के कम से कम दो क्षेत्रों के वितरण नेटवर्क को भविष्य में होने वाले पूंजीगत निवेश के लिए तैयार किया जाएगा।
(इनपुट-एएनआई)


