केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान “इनोवेशन टू इम्पैक्ट: एआई ऐज अ पब्लिक हेल्थ गेम-चेंजर” विषयक सत्र में भाग लिया। इस सत्र में सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने और भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को मजबूत करने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की परिवर्तनकारी भूमिका पर चर्चा की गई।
मुख्य वक्तव्य देते हुए अनुप्रिया पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुसार “एआई फॉर इंडिया” केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नहीं, बल्कि ऑल-इन्क्लूसिव इंटेलिजेंस है। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई का मूल्यांकन एल्गोरिद्म की जटिलता से नहीं, बल्कि इस आधार पर किया जाना चाहिए कि वह लोगों के जीवन को किस हद तक प्रभावित करता है और स्वास्थ्य असमानताओं को कितना कम करता है।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में स्वास्थ्य एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। भारत की विशाल और विविध आबादी, ग्रामीण-शहरी अंतर तथा संक्रामक और असंक्रामक रोगों का दोहरा बोझ विशेष चुनौतियां प्रस्तुत करता है। ऐसे परिदृश्य में एआई एक महत्वपूर्ण सहायक साधन बनकर उभरा है।
उन्होंने बताया कि एआई को स्वास्थ्य सेवा की पूरी श्रृंखला में शामिल किया गया है—रोग निगरानी और रोकथाम से लेकर निदान और उपचार तक। मीडिया डिजीज सर्विलांस सिस्टम 13 भाषाओं में रोग प्रवृत्तियों की निगरानी करता है और रियल-टाइम अलर्ट जारी कर प्रकोप की तैयारी को मजबूत बनाता है। वन हेल्थ मिशन के तहत भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने जीनोमिक सर्विलांस के लिए एआई-आधारित उपकरण विकसित किए हैं, जो पशुओं से मनुष्यों में संक्रमण से पहले संभावित ज़ूनोटिक प्रकोप का अनुमान लगाने में सक्षम हैं।
तपेदिक नियंत्रण में एआई-सक्षम हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों और कंप्यूटर एडेड डिटेक्शन (सीए-टीबी) उपकरणों के उपयोग से लगभग 16 प्रतिशत अतिरिक्त मामलों की पहचान संभव हुई है। इसके अलावा, एआई आधारित उपचार पूर्वानुमान उपकरणों के कारण नकारात्मक उपचार परिणामों में 27 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
अनुप्रिया पटेल ने स्पष्ट किया कि एआई चिकित्सकों का स्थान लेने के लिए नहीं, बल्कि उनकी सहायता के लिए है। इससे डॉक्टर नियमित और समय-साध्य कार्यों से मुक्त होकर जटिल मामलों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सा केवल विज्ञान नहीं, बल्कि संवेदना, सहानुभूति और संवाद की कला भी है, जिसे मशीनें प्रतिस्थापित नहीं कर सकतीं।
नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) प्रो. वी. के. पॉल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारत के स्वास्थ्य तंत्र को बदलने और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में प्रगति तेज करने का रणनीतिक अवसर प्रदान करती है। उन्होंने मजबूत नियामक ढांचे, नैतिक सुरक्षा उपायों और निरंतर सत्यापन की आवश्यकता पर बल दिया।
रॉयल फिलिप्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रॉय जैकब्स ने कहा कि एआई का सबसे अधिक प्रभाव स्वास्थ्य क्षेत्र में दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य प्रणालियां बढ़ती मांग और संसाधन चुनौतियों का सामना कर रही हैं, ऐसे में एआई का एकीकरण आवश्यक है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आयुष्मान भारत योजना जैसी मजबूत डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना एआई की पूर्ण क्षमता को साकार करने की आधारशिला है।
सत्र के दौरान यह साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की गई कि एआई को जिम्मेदारी, पारदर्शिता और नैतिकता के साथ बड़े पैमाने पर लागू किया जाएगा। एआई रोग निगरानी, निदान, क्लिनिकल निर्णय और स्वास्थ्य तंत्र की दक्षता को मजबूत कर सकता है, लेकिन इसका उद्देश्य चिकित्सकों को प्रतिस्थापित करना नहीं, बल्कि उन्हें सशक्त बनाना है।


