भारत और फ्रांस ने भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल विमान की खरीद के लिए सोमवार को एक अंतर-सरकारी समझौते (आईजीए) पर हस्ताक्षर किए हैं। फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन द्वारा निर्मित, राफेल-मरीन एक लड़ाकू विमान है जो समुद्री क्षेत्र में पूर्ण रूप से चलने में सक्षम है। इन विमानों की डिलीवरी वर्ष 2030 तक पूरी हो जाएगी, जिसके चालक दल को फ्रांस और भारत में प्रशिक्षण दिया जाएगा।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस के सशस्त्र बल मंत्री सेबेस्टियन लेकॉर्नू ने अंतर-सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। कल सोमवार को नई दिल्ली में नौसेना भवन में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में भारत और फ्रांस के अधिकारियों ने समझौते, विमान पैकेज आपूर्ति प्रोटोकॉल और हथियार पैकेज आपूर्ति प्रोटोकॉल की हस्ताक्षरित प्रतियों का आदान-प्रदान किया।

मंत्रालय ने बताया कि इस समझौते में स्वदेशी हथियारों के एकीकरण के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण शामिल है, जो आत्मनिर्भर भारत पर सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप है। इसमें राफेल विमान के मुख्‍य-भाग (फ्यूज़लेज) उत्पादन सुविधा शुरू करने के साथ-साथ भारत में विमान इंजन, सेंसर और हथियारों के लिए रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल सुविधाएं भी शामिल हैं।

इस सौदे से इन सुविधाओं के शुरू होने से उत्पादन और संचालन में काफी संख्‍या में एमएसएमई के लिए हजारों नौकरियां और आय सृजन की उम्मीद है।
राफेल-मरीन की खरीद से भारतीय नौसेना और भारतीय वायुसेना दोनों के लिए विमान के लिए प्रशिक्षण और रक्षा सामग्री को अनुकूलित करने के साथ-साथ संयुक्त परिचालन क्षमता में भी काफी वृद्धि होगी।

राफेल-मरीन के शामिल होने से भारतीय नौसेना के विमानवाहक पोतों की मारक क्षमता में काफी बढोत्तरी होगी।

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