भारत और आइसलैंड ने नवीकरणीय ऊर्जा और हरित तकनीक के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के अवसरों पर चर्चा की। दोनों देशों ने नई दिल्ली में 7 अक्टूबर को होने वाले प्रॉस्पेरिटी समिट को लेकर भी बातचीत की।
यह चर्चा आइसलैंड में भारत के राजदूत आर. रवींद्र और आइसलैंड के पर्यावरण, ऊर्जा एवं जलवायु मंत्री जोहान पाल जोहानसन के बीच हुई। भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच X पर बताया कि बैठक में प्रॉस्पेरिटी समिट और नवीकरणीय ऊर्जा तथा स्वच्छ एवं हरित तकनीक के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा हुई।
इससे पहले अगस्त में राजदूत आर. रवींद्र ने आइसलैंड के बुनियादी ढांचा मंत्री एयोल्फुर आर्मानसन से मुलाकात की थी। इस दौरान हरित समुद्री परिवहन, क्षमता निर्माण और मत्स्य क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी। बैठक में आइसलैंड के बुनियादी ढांचा मंत्रालय के अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया था।
मई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्त्रुन फ्रॉस्टाडोट्टिर ने ओस्लो में तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन से इतर मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने स्वच्छ ऊर्जा, मत्स्य पालन, टिकाऊ विकास, भू-तापीय ऊर्जा तथा कार्बन कैप्चर और भंडारण जैसे क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने पर चर्चा की थी।
यह दोनों नेताओं की पहली मुलाकात थी, जब से फ्रॉस्टाडोट्टिर ने आइसलैंड के प्रधानमंत्री का पद संभाला है। दोनों ने भारत-आइसलैंड संबंधों को और मजबूत करने के साथ भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) के लागू होने से व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई।
दोनों नेताओं ने भू-तापीय ऊर्जा, मत्स्य पालन, नई तकनीक, रचनात्मक अर्थव्यवस्था, संस्कृति, पर्यटन, आवागमन और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की भी समीक्षा की। इसके अलावा आर्कटिक क्षेत्र में अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री मोदी ने उस समय कहा था कि भारत आइसलैंड के साथ मित्रता को बहुत महत्व देता है। उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा, मत्स्य पालन, टिकाऊ विकास, भू-तापीय ऊर्जा और कार्बन कैप्चर एवं भंडारण सहित कई क्षेत्रों में संबंधों को आगे बढ़ाने की बात कही थी।
-(इनपुटः IANS)


