भारत और रूस ने आज शुक्रवार को 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त बयान में नागरिक परमाणु ऊर्जा और व्यापक ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों देशों ने कहा कि उनका स्पेशल एंड प्रिविलेज्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप भारत-रूस संबंधों की आधारशिला है और ऊर्जा सहयोग इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
बैठक में तेल और तेल उत्पाद, रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल तकनीकें, ऑयलफील्ड सेवाएं, अपस्ट्रीम तकनीकें, लिक्विफाइड नैचुरल गैस-एलएनजी) और (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस-एलपीजी) अवसंरचना, (अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन – यूसीजी) तकनीक और परमाणु परियोजनाओं में जारी और संभावित सहयोग की विस्तृत समीक्षा की गई। दोनों पक्षों ने ऊर्जा निवेश परियोजनाओं से जुड़े लंबित मुद्दों के समय पर समाधान पर जोर दिया और निवेशकों की चिंताओं को संबोधित करने पर सहमति जताई।
नेताओं ने कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट- KKNPP में जारी कार्यों की प्रगति की सराहना की, खासकर शेष इकाइयों के निर्माण और उपकरण तथा ईंधन आपूर्ति की समयसीमा का पालन करने पर जोर दिया। इसके साथ ही, भारत में दूसरी परमाणु ऊर्जा परियोजना के लिए स्थल पर चर्चा को आगे बढ़ाने पर भी सहमति बनी, जिसमें भारत ने पहले हुए समझौतों के अनुसार भूमि आवंटन को अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता जताई।
दोनों देशों ने रूसी डिजाइन वाले VVER (वी-वी-ई-आर / वाटर-वाटर एनर्जेटिक रिएक्टर) परमाणु रिएक्टरों पर तकनीकी और वाणिज्यिक चर्चाओं को तेज करने पर सहमति व्यक्त की। इसमें अनुसंधान, संयुक्त विकास, स्थानीयकरण, और बड़े क्षमता वाले रूसी-डिजाइन परमाणु संयंत्रों के लिए उपकरण और फ्यूल असेंबली के संयुक्त निर्माण जैसे पहलू शामिल होंगे। यह समूचा सहयोग आपसी सहमति और निर्धारित शर्तों के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा।-(PIB)


