प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आज शुक्रवार को आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने, कनेक्टिविटी सुधारने और रूसी फार ईस्ट और आर्कटिक क्षेत्रों में नए अवसर तलाशने के अपने साझे लक्ष्य की पुष्टि की। प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन ने द्विपक्षीय व्यापार को संतुलित तरीके से बढ़ाने की अपनी महत्वाकांक्षा दोहराई। इसमें भारत के निर्यात को बढ़ाना, औद्योगिक और तकनीकी सहयोग मजबूत करना और उच्च तकनीकी क्षेत्रों में नए निवेश साझेदारियों का विकास शामिल है। दोनों नेताओं ने भारत-रूस आर्थिक सहयोग के रणनीतिक क्षेत्रों के विकास के लिए 2030 तक के कार्यक्रम को अपनाने का स्वागत किया।
दोनों पक्षों ने भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की प्रगति की सराहना की और निवेश के संवर्धन और संरक्षण पर पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते के लिए वार्ता तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने 25वीं और 26वीं IRIGC-TEC सत्रों और नई दिल्ली (नवंबर 2024) और मॉस्को (अगस्त 2025) में आयोजित इंडिया-रशिया बिजनेस फोरम के परिणामों का भी स्वागत किया। दोनों नेताओं ने WTO के केंद्रीय भूमिका वाले खुले, समावेशी और गैर-भेदभावपूर्ण बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली का समर्थन करते हुए टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाओं को दूर करने, लॉजिस्टिक्स में सुधार, कनेक्टिविटी बढ़ाने, भुगतान प्रणाली को सुचारू बनाने और बीमा व पुनर्बीमा चुनौतियों को हल करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इन कदमों को 2030 तक 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर के संशोधित द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को हासिल करने के लिए जरूरी बताया गया।
भारत और रूस ने निर्बाध व्यापार सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय मुद्राओं का उपयोग करते हुए द्विपक्षीय निपटान प्रणाली विकसित करने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने राष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों, वित्तीय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी प्रणालियों की इंटरऑपरेबिलिटी पर चर्चा जारी रखने पर भी सहमति व्यक्त की। उर्वरक आपूर्ति को सुरक्षित करने और इस क्षेत्र में संभावित संयुक्त उद्यमों की संभावना पर भी विचार किया गया। कौशल मजदूरों की गतिशीलता से जुड़े समझौतों का स्वागत किया गया।
रूस ने सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (जून 2025) और ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम (सितंबर 2025) में भारत की भागीदारी की सराहना की। दोनों पक्षों ने भारत-रूस बिजनेस डायलॉग की भूमिका को भी नोट किया, जिसने व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने में योगदान दिया। नेताओं ने खनिज संसाधनों, ऊर्जा स्रोतों, कीमती पत्थरों, धातुओं और आवश्यक कच्चे माल में उत्पादक द्विपक्षीय व्यापार के महत्व को उजागर किया, यह कहते हुए कि इन क्षेत्रों में विश्वसनीय सहयोग राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
परिवहन और कनेक्टिविटी
दोनों देशों ने स्थिर और कुशल परिवहन गलियारों पर सहयोग बढ़ाने, खासकर इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC), चेन्नई-वलादिवोस्तोक मैरिटाइम कॉरिडोर और नॉर्दर्न सी रूट के माध्यम से कनेक्टिविटी बढ़ाने पर सहमति जताई। उन्होंने ध्रुवीय जल में संचालन करने वाले जहाजों के लिए विशेषज्ञों के प्रशिक्षण पर MoU का स्वागत किया। दोनों देशों ने रेलवे सहयोग की प्रगति का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य तकनीकी आदान-प्रदान के माध्यम से साझेदारी को मजबूत करना है।
रूसी फार ईस्ट और आर्कटिक में सहयोग
भारत और रूस ने रूसी फार ईस्ट और आर्कटिक क्षेत्रों में व्यापार और निवेश सहयोग को और गहरा करने की तत्परता दोहराई। उन्होंने 2024-2029 के व्यापार, आर्थिक और निवेश सहयोग कार्यक्रम को उजागर किया, जो कृषि, ऊर्जा, खनन, मानव संसाधन, हीरे, फार्मास्यूटिकल्स और समुद्री परिवहन में सहयोग का ढांचा प्रदान करता है। दोनों पक्षों ने आर्कटिक मुद्दों पर नियमित द्विपक्षीय परामर्श की आवश्यकता पर जोर दिया और नॉर्दर्न सी रूट पर बहुपक्षीय सहयोग में प्रगति को नोट किया। रूस ने मार्च 2025 में मुरमान्स्क में आयोजित 6वें इंटरनेशनल आर्कटिक फोरम में भारत की भागीदारी की सराहना की।


