भारत-जर्मनी राजनयिक संबंधों के 75 साल, पीएम मोदी ने चांसलर मर्ज से की बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को भारत और जर्मनी के बीच राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने के अवसर पर संघीय चांसलर फ्रेडरिक मर्ज से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत तकनीक और टैलेंट मोबिलिटी समेत कई अहम क्षेत्रों में द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा की।

पीएम मोदी ने साझा की बातचीत की जानकारी

पीएम मोदी ने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए बातचीत की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ आत्मीय और सार्थक बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने भारत-जर्मनी राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे होने के मौके पर व्यापार और निवेश, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत तकनीक, टैलेंट मोबिलिटी और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के संकल्प को दोहराया।

जर्मनी को बताया यूरोप का अहम स्तंभ

पीएम मोदी ने जर्मनी को यूरोप के साथ भारत के संबंधों का अहम स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि जर्मनी वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने में भारत का महत्वपूर्ण साझेदार है। दोनों देश अपने नागरिकों के हित में भविष्योन्मुखी रणनीतिक साझेदारी को लगातार मजबूत करते रहेंगे।

2026 में पूरे हुए 75 साल के राजनयिक संबंध

भारत और जर्मनी के बीच 2026 में राजनयिक संबंधों के 75 साल पूरे हुए हैं। इसी साल दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष भी पूरे हुए हैं। जर्मनी यूरोपीय संघ में भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है और भारत में 2,000 से अधिक जर्मन कंपनियां काम कर रही हैं।

1951 में स्थापित हुए थे राजनयिक संबंध

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भारत शुरुआती देशों में शामिल था, जिसने जर्मनी के साथ युद्ध की स्थिति समाप्त होने के बाद मार्च 1951 में राजनयिक संबंध स्थापित किए। दोनों देशों ने वर्ष 2000 में रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत की थी, जिसके अब 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं।

जनवरी में भारत आए थे चांसलर मर्ज

पीएमओ के अनुसार, चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर 12-13 जनवरी 2026 को भारत की आधिकारिक यात्रा की थी। उनके साथ 23 प्रमुख जर्मन सीईओ और उद्योगपतियों समेत एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया था।

मर्ज की पहली आधिकारिक भारत यात्रा

चांसलर के रूप में मर्ज की यह पहली आधिकारिक भारत यात्रा थी। यह संघीय चांसलर के तौर पर उनकी एशिया की पहली यात्रा भी थी। इसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत को जर्मनी द्वारा दिए जा रहे उच्च रणनीतिक महत्व के संकेत के रूप में देखा गया।

रक्षा सहयोग में सह-विकास और सह-उत्पादन पर जोर

भारत और जर्मनी ने व्यापार, निवेश और रक्षा सहयोग को नई गति देने पर जोर दिया है। दोनों देशों के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप पर भी सहमति बनी है। यह पारंपरिक क्रेता-विक्रेता संबंध से आगे बढ़कर सह-विकास और सह-उत्पादन पर आधारित सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत तकनीक में बढ़ रहा सहयोग

भारत और जर्मनी के बीच नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, डिजिटल शासन और उन्नत तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग लगातार बढ़ रहा है। दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी में इन क्षेत्रों की भूमिका आने वाले वर्षों में और महत्वपूर्ण होने की उम्मीद है। (इनपुट: आईएएनएस)