वैश्विक समस्याओं का समाधानकर्ता के रूप में उभरा भारत : केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने सोमवार को कहा कि आज पूरी दुनिया भारत को वैश्विक चुनौतियों के समाधान के एक प्रमुख भागीदार के रूप में देख रही है। उन्होंने इसका श्रेय भारत की बढ़ती क्षमताओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले 11 वर्षों के स्थिर और निर्णायक नेतृत्व को दिया। उन्होंने यह बयान संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन के दौरान दिया, जिसमें 150 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों, मंत्रियों, वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया।

डॉ. सिंह ने कहा कि 2014 के बाद से भारत की वैश्विक छवि में बड़ा परिवर्तन आया है और अब विश्व भर के प्रतिनिधियों में भारत के साथ जुड़ने की गहरी उत्सुकता देखी जा रही है। उन्होंने इसे एक “सुखद संयोग” बताया कि जब मोदी सरकार अपने कार्यकाल के 11 वर्ष पूरे कर रही है, उसी समय भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा भी तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा, “बीते दो दिनों में हमने यह महसूस किया कि दुनिया को भारत से कितनी उम्मीदें हैं।”

समुद्री चुनौतियों पर बात करते हुए डॉ. सिंह ने बताया कि भारत महासागरों के बढ़ते तापमान, जलस्तर और प्रदूषण जैसे मुद्दों पर अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने दो स्वतंत्रता दिवस भाषणों में ‘डीप ओशन मिशन’ का जिक्र कर समुद्र की सेहत को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की है। यह मिशन समुद्री संसाधनों की खोज और गहरे समुद्र में उपयोगी तकनीकों के विकास के लिए चलाया जा रहा है, जिसमें ISRO और कई राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों की भागीदारी है।

डॉ. सिंह ने इस पर भी प्रकाश डाला कि समुद्र से जुड़ी समस्याएं वैश्विक हैं क्योंकि महासागर धरती के लगभग 70% हिस्से को कवर करते हैं और किसी भी देश की सीमाओं से परे हैं। उन्होंने कहा, “तेजी से बढ़ते समुद्री तापमान, समुद्र स्तर में वृद्धि, तेल रिसाव और प्लास्टिक प्रदूषण जैसी समस्याएं पूरी मानवता को प्रभावित करती हैं।”

उन्होंने यह भी बताया कि भारत एक ऐसा पहला देश है जिसने सिंगल-यूज प्लास्टिक पर आधिकारिक रूप से प्रतिबंध लगाया। साथ ही, भारत एक “Whole-of-Government और Whole-of-Science” दृष्टिकोण के साथ समुद्री और पर्यावरणीय मुद्दों को हल करने में जुटा है।

डॉ. सिंह ने यह भी जानकारी दी कि कई देशों ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल से अलग-अलग बैठकें करने की इच्छा जताई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास जैसे वैश्विक विमर्शों में भारत की भूमिका अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।-(PIB)

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