केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने बुधवार को संसद में बताया कि भारत ने अंतरिक्ष परिवहन प्रणालियों में आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है। उन्होंने कहा कि भारत अब लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में 10 टन तक और जियो-सिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में 4.2 टन तक के उपग्रह लॉन्च करने में सक्षम है।
लोकसभा में लिखित जवाब में मंत्री ने बताया कि यह उपलब्धि PSLV, GSLV और LVM3 जैसे वर्तमान में कार्यरत लॉन्च वाहनों के जरिए हासिल की गई है।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि इन लॉन्च वाहनों ने पृथ्वी अवलोकन, संचार, नेविगेशन और अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए भारत को स्वतंत्र अंतरिक्ष पहुंच उपलब्ध कराई है। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ते लक्ष्यों को पूरा करने के लिए सरकार ने नेक्स्ट जेनरेशन लॉन्च व्हीकल (NGLV) के विकास को मंजूरी दी है, जो LEO में 30 टन तक पेलोड ले जाने में सक्षम होगा।
उन्होंने आगे बताया कि कम लागत में अंतरिक्ष तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए री-यूजेबल लॉन्च व्हीकल तकनीक पर भी काम किया जा रहा है। इसमें NGLV का एक आंशिक रूप से पुनः उपयोग योग्य संस्करण शामिल है, जो LEO में 14 टन पेलोड ले जा सकेगा। इसके अलावा, एक विंग्ड बॉडी अपर स्टेज भी विकसित किया जा रहा है, जो कक्षा से पृथ्वी पर वापस आकर अपने आप रनवे पर लैंड करेगा।
मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि ISRO, LVM3 रॉकेट में उपयोग के लिए 2000 किलो न्यूटन थ्रस्ट वाले सेमी-क्रायोजेनिक इंजन का विकास कर रहा है।
इसके साथ ही, NGLV के लिए पर्यावरण के अनुकूल मीथेन आधारित प्रोपल्शन सिस्टम की भी परिकल्पना की जा रही है। उन्होंने बताया कि ड्यूल-फ्यूल स्क्रैमजेट इंजन के लिए एयर-ब्रीदिंग प्रोपल्शन सिस्टम का विकास भी जारी है।
जितेंद्र सिंह ने गगनयान मिशन, जो भारत का मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है, उसकी प्रगति और समय-सीमा की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि गगनयान मिशन का उद्देश्य LEO तक स्वदेशी मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता को प्रदर्शित करना है और इसका पहला मानव मिशन 2027–28 में लॉन्च किए जाने की उम्मीद है।
मंत्री के अनुसार, गगनयान कार्यक्रम के तहत ISRO विभिन्न प्रणालियों का विकास कर रहा है। मानव मिशन की सख्त सुरक्षा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ह्यूमन-रेटेड लॉन्च व्हीकल (HLVM3), सर्विस मॉड्यूल प्रोपल्शन सिस्टम, क्रू मॉड्यूल प्रोपल्शन सिस्टम और पैराशूट आधारित डीसलेरेशन सिस्टम का व्यापक परीक्षण पूरा किया जा चुका है।
पहले मानव रहित मिशन G1 के लिए HLVM3 के सभी चरण और क्रू एस्केप सिस्टम (CES) मोटर्स तैयार हैं। क्रू और सर्विस मॉड्यूल सिस्टम भी विकसित हो चुके हैं और उनके असेंबली व इंटीग्रेशन का काम अंतिम चरण में है।
मंत्री ने यह भी बताया कि दिसंबर 2020 से दिसंबर 2025 के बीच ISRO ने कुल 22 उपग्रह लॉन्च किए हैं। इनमें 7 पृथ्वी अवलोकन, 4 संचार, 2 नेविगेशन, 3 अंतरिक्ष विज्ञान और 6 प्रौद्योगिकी प्रदर्शन मिशन शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 और 2021 में एक-एक, 2022 में छह, 2023 में चार और 2024 में छह उपग्रह लॉन्च किए गए। जबकि 2025 में NVS-02, CMS-03 (GSAT-7R), RISAT-1B और NISAR उपग्रह लॉन्च किए गए।
-(इनपुटःएजेंसी)


