Print

पर्यावरण और विकास के संतुलन की राह पर आगे बढ़ता भारत

भारत ने पर्यावरण संरक्षण और जलवायु एक्शन को विकास के केंद्र में रखते हुए एक समग्र और संतुलित रणनीति अपनाई है, जिसका उद्देश्य आर्थिक प्रगति के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा सुनिश्चित करना है।

“India’s Green Pathway: From Conservation to Climate Action” रिपोर्ट में भारत के पर्यावरण संरक्षण और जलवायु कार्रवाई के व्यापक दृष्टिकोण को सामने रखा गया है, जिसमें विकास और प्रकृति के बीच संतुलन को प्राथमिकता दी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास को एक-दूसरे के पूरक के रूप में अपनाया है। देश जलवायु परिवर्तन को भविष्य का नहीं, बल्कि वर्तमान का संकट मानते हुए सक्रिय कदम उठा रहा है।

भारत दुनिया के 17 मेगा-बायोडायवर्स देशों में शामिल है और यहां लगभग 8 प्रतिशत वैश्विक प्रजातियां पाई जाती हैं। जैव विविधता संरक्षण के लिए कई कानून और नीतियां लागू हैं, जिनमें Biological Diversity Act, 2002 और National Biodiversity Action Plan शामिल हैं।

वन्यजीव संरक्षण के तहत ‘Project Tiger’, ‘Project Elephant’ और ‘Project Cheetah’ जैसे कार्यक्रमों का विस्तार किया गया है। देश में संरक्षित क्षेत्रों की संख्या 2014 के 745 से बढ़कर 2025 में 1,134 हो गई है।

पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ भारत ने जलवायु कार्रवाई के क्षेत्र में भी तेजी से प्रगति की है। 2025 तक देश ने 50 प्रतिशत से अधिक बिजली क्षमता गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से हासिल कर ली है, जो 2030 के लक्ष्य से पहले ही प्राप्त हो गया।

National Action Plan on Climate Change (NAPCC), Nationally Determined Contributions (NDC) और Long-Term Low Emissions Development Strategy जैसे ढांचे भारत की जलवायु नीति का आधार हैं। देश ने 2030 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता को 45 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखा है।

साथ ही, National Green Hydrogen Mission और नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार से भारत स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि Mission LiFE के तहत करोड़ों लोगों को पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी लाई जा सके।

प्रदूषण नियंत्रण के लिए National Clean Air Programme जैसे अभियानों के तहत 130 शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसमें कई शहरों में PM10 स्तर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

कुल मिलाकर, रिपोर्ट के अनुसार भारत ने जैव विविधता संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा, प्रदूषण नियंत्रण और सतत विकास को जोड़ते हुए एक समग्र पर्यावरणीय रणनीति विकसित की है, जो 2050 तक “प्रकृति के साथ संतुलन” के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।