केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि भारत–न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA) भारत के 100 प्रतिशत निर्यात पर शून्य शुल्क (Zero Duty) सुनिश्चित करेगा। इससे किसानों, MSMEs, श्रमिकों, कारीगरों, महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों और युवाओं को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही टेक्सटाइल, परिधान, लेदर और फुटवियर जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए बड़े अवसर खुलेंगे।
उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, प्लास्टिक, फार्मास्यूटिकल्स और केमिकल्स जैसे क्षेत्र भी इस समझौते से लाभान्वित होंगे।
पीयूष गोयल ने बताया कि यह समझौता निवेश को भी बड़ा प्रोत्साहन देगा। इसके तहत न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को सुविधाजनक बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। यह निवेश मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, सेवाओं, नवाचार और रोजगार सृजन पर केंद्रित होगा।
मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा,
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के नेतृत्व में, और मेरे समकक्ष मंत्री टॉड मैक्ले के सहयोग से भारत और न्यूजीलैंड ने महज नौ महीनों में एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता सफलतापूर्वक पूरा किया है। यह हमारे द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।”
उन्होंने कहा कि किसानों को सशक्त बनाने पर केंद्रित इस FTA से भारतीय कृषि उत्पादों के लिए न्यूजीलैंड के बाजार में नए अवसर खुलेंगे। इनमें फल, सब्जियां, कॉफी, मसाले, अनाज और प्रोसेस्ड फूड शामिल हैं।
एग्रीकल्चरल प्रोडक्टिविटी पार्टनरशिप, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और न्यूजीलैंड की उन्नत कृषि तकनीकों तक पहुंच के माध्यम से किसानों को उत्पादकता बढ़ाने, गुणवत्ता सुधारने और आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा शहद, कीवी और सेब जैसे बागवानी उत्पादों के लिए लक्षित पहलें भी की गई हैं, जिससे इस क्षेत्र में सतत विकास को बल मिलेगा।
घरेलू संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखते हुए भारत ने डेयरी, चीनी, कॉफी, मसाले, खाद्य तेल, कीमती धातुएं (सोना-चांदी), कीमती धातुओं का स्क्रैप, कॉपर कैथोड और रबर आधारित उत्पादों को इस समझौते में सुरक्षित रखा है, ताकि किसानों, MSMEs और घरेलू उद्योगों के हितों की रक्षा हो सके।
यह FTA भारत के सेवा क्षेत्र के लिए भी नए अवसर पैदा करता है। इसमें आईटी और आईटीईएस, वित्त, शिक्षा, पर्यटन, निर्माण और अन्य क्षेत्र शामिल हैं। न्यूजीलैंड द्वारा पहली बार स्वास्थ्य, पारंपरिक चिकित्सा, छात्र मोबिलिटी और पोस्ट-स्टडी वर्क से जुड़े विशेष परिशिष्ट शामिल किए गए हैं, जिससे भारतीय पेशेवरों और छात्रों के लिए नए रास्ते खुलेंगे।
इसके अलावा, बेहतर मोबिलिटी प्रावधानों के तहत वर्किंग हॉलिडे वीजा, पोस्ट-स्टडी वर्क के अवसर और 5,000 अस्थायी रोजगार वीजा का एक विशेष कोटा तय किया गया है। इससे कुशल भारतीय पेशेवरों को वैश्विक स्तर पर बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
पीयूष गोयल ने कहा,
“यह परस्पर लाभकारी समझौता भारत–न्यूजीलैंड आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करेगा और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में भारत की यात्रा को आगे बढ़ाएगा।”
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इस FTA में न्यूजीलैंड द्वारा भारत को अब तक का सबसे बेहतर बाजार पहुंच और सेवा प्रस्ताव दिया गया है। इसमें 118 सेवा क्षेत्र शामिल हैं, जैसे कंप्यूटर संबंधित सेवाएं, प्रोफेशनल सर्विसेज, ऑडियो-विजुअल, टेलीकॉम, कंस्ट्रक्शन, टूरिज्म और ट्रैवल सेवाएं। इसके अलावा 139 उप-क्षेत्रों में मोस्ट-फेवर्ड नेशन (MFN) प्रतिबद्धता भी दी गई है।
यह समझौता कुशल रोजगार के नए रास्ते भी खोलता है। इसके तहत भारतीय पेशेवरों के लिए टेम्पररी एम्प्लॉयमेंट एंट्री वीजा की नई व्यवस्था की गई है, जिसमें एक समय में 5,000 वीजा और तीन साल तक ठहरने की अनुमति होगी। इसमें आयुष चिकित्सक, योग प्रशिक्षक, भारतीय शेफ, संगीत शिक्षक, साथ ही आईटी, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर, शिक्षा और निर्माण जैसे उच्च मांग वाले क्षेत्र शामिल हैं।
टैरिफ में कटौती के अलावा, FTA में नॉन-टैरिफ बाधाओं को दूर करने के लिए बेहतर नियामक सहयोग, पारदर्शिता, सरल कस्टम प्रक्रियाएं, SPS उपाय और टेक्निकल बैरियर्स टू ट्रेड से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं, ताकि निर्यातकों को वास्तविक और प्रभावी बाजार पहुंच मिल सके।
इस समझौते पर प्रतिक्रिया देते हुए न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा,
“हमने भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता पूरा कर लिया है। इससे न्यूजीलैंड के किसानों, उत्पादकों और कारोबारियों के लिए नए दरवाजे खुलेंगे, निर्यात बढ़ेगा, रोजगार पैदा होंगे और आय में वृद्धि होगी।”
-(इनपुटःएजेंसी)


