केंद्रीय राज्य मंत्री श्रिपाद वाई. नाईक ने बुधवार को कहा कि भारत वर्ष 2030 तक विश्व की कुल ग्रीन हाइड्रोजन मांग का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
‘तीसरे अंतरराष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन सम्मेलन (ICGH 2025)’ को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और COP-26 में दिए गए ‘पंचामृत’ संकल्पों के तहत भारत की ऊर्जा संक्रमण नीति दुनिया की सबसे साहसिक और तेज़ पहलों में से एक है।
उन्होंने बताया कि भारत 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता और 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में निरंतर प्रगति कर रहा है।
मंत्री ने कहा कि वर्तमान में देश की नॉन-फॉसिल फ्यूल आधारित स्थापित ऊर्जा क्षमता लगभग 260 गीगावाट तक पहुँच चुकी है, जिसमें सौर और पवन ऊर्जा की प्रमुख भूमिका है।
उन्होंने कहा, “यह मज़बूत नवीकरणीय ऊर्जा आधार अब भारत को ग्रीन हाइड्रोजन क्रांति की दिशा में निर्णायक कदम उठाने में सक्षम बना रहा है — जो उद्योगों को डिकार्बोनाइज़ कर सकती है, परिवहन को स्वच्छ बना सकती है और वैश्विक व्यापार के नए अवसर खोल सकती है।”
नाईक ने बताया कि भारत का ग्रीन हाइड्रोजन बाजार अगले एक दशक में 20 से 40 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ने का अनुमान है। नवीकरणीय संसाधनों की प्रचुरता, अनुकूल नीतियों और रणनीतिक स्थिति के चलते भारत ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन अमोनिया और मेथनॉल जैसे डेरिवेटिव्स का अग्रणी उत्पादक और निर्यातक बनने की दिशा में अग्रसर है।
उन्होंने कहा कि भारत केवल इस वैश्विक संक्रमण में भागीदार नहीं, बल्कि नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहा है — मजबूत नीति ढांचे, मानकीकरण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से।
केंद्रीय मंत्री ने उद्योग जगत और निवेशकों से परियोजनाओं को तेजी से लागू करने, इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण को बढ़ाने और नवाचार को प्रोत्साहन देने का आग्रह किया। उन्होंने राज्यों से हाइड्रोजन हब और औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने की अपील भी की।
नाईक ने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन परिवर्तन न केवल ऊर्जा का, बल्कि आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक परिवर्तन भी है, जो सतत समृद्धि की दिशा में भारत की स्थिति को और मज़बूत करेगा।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM), जो जनवरी 2023 में शुरू किया गया था, अब योजना से अमल के चरण में प्रवेश कर चुका है। इसके तहत ₹17,000 करोड़ की प्रोत्साहन योजनाएँ ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन और इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण को बढ़ावा दे रही हैं।
3,000 मेगावाट प्रतिवर्ष की घरेलू इलेक्ट्रोलाइज़र क्षमता और 8.62 लाख मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की परियोजनाएँ मंजूर की जा चुकी हैं। सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) ने 7.24 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष ग्रीन अमोनिया की आपूर्ति के लिए विश्व में सबसे प्रतिस्पर्धी कीमतें निर्धारित की हैं।
इसके अलावा, 20,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष ग्रीन हाइड्रोजन की आपूर्ति IOCL, BPCL और HPCL रिफाइनरियों को देने के लिए परियोजनाएँ स्वीकृत की गई हैं।
नाईक ने कहा कि ICGH 2025 भारत की स्वच्छ ऊर्जा तकनीक को आगे बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और सतत भविष्य की दिशा में हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
-(इनपुटःएजेंसी)


