विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को रूस में भारत के दो नए कॉन्सुलेट जनरल (महावाणिज्य दूतावास) का उद्घाटन किया और कहा कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, सांस्कृतिक संबंध और लोगों के बीच संपर्क और मजबूत होंगे।
ये नए दूतावास येकातेरिनबर्ग और कज़ान में खोले गए हैं। जयशंकर ने कहा कि इन दूतावासों की स्थापना पर पिछले कुछ महीनों से निरंतर काम हो रहा था।
कार्यक्रम में रूसी उप-विदेश मंत्री आंद्रे रूडेंको, रूस में भारतीय राजदूत विनय कुमार, दोनों क्षेत्रों के प्रशासनिक अधिकारी और भारतीय समुदाय के सदस्य मौजूद थे।
येकातेरिनबर्ग—साइबेरिया का प्रवेशद्वार, भारी उद्योग का केंद्र
जयशंकर ने कहा कि येकातेरिनबर्ग को आर्थिक महत्व की वजह से रूस की “तीसरी राजधानी” कहा जाता है। यह क्षेत्र भारी इंजीनियरिंग, रत्न प्रसंस्करण, रक्षा उत्पादन, धातुकर्म, परमाणु ईंधन, रसायन और चिकित्सा उपकरणों के लिए जाना जाता है।
उन्होंने कहा कि नया कॉन्सुलेट दोनों देशों की कंपनियों के बीच तकनीकी, वैज्ञानिक, आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को तेज़ करेगा।
कज़ान—बहुसांस्कृतिक केंद्र, एशिया का द्वार
जयशंकर ने कहा कि कज़ान रूस के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले शहरों में से एक है और यह रूस और एशिया के बीच सांस्कृतिक सेतु की तरह काम करता है।
कज़ान तेल उत्पादन, उर्वरक, ऑटोमोबाइल, रक्षा उत्पादन, फार्मा और इलेक्ट्रिकल उपकरणों के लिए भी महत्वपूर्ण केंद्र है।
उन्होंने कहा कि यहां कॉन्सुलेट खुलने से सांस्कृतिक विनिमय, ITEC कार्यक्रम और लोगों के बीच जुड़ाव बढ़ेगा।
भारतीय समुदाय और छात्रों को लाभ मिलेगा
जयशंकर ने भरोसा जताया कि नए दूतावास भारतीय छात्रों, कारोबारी समुदाय और प्रवासी भारतीयों के लिए दूतावास सेवाओं को और आसान बनाएंगे।
उन्होंने कहा, “ये दूतावास न केवल हमारी राजनयिक उपस्थिति बढ़ाएँगे, बल्कि व्यापार, पर्यटन, तकनीक, शिक्षा और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ाने में उत्प्रेरक का काम करेंगे”।
-(इनपुटःएजेंसी)


