भारत ने 2011-2020 के दौरान 2.176 करोड़ हेक्टेयर भूमि बहाल की: भूपेंद्र यादव

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि भूमि बहाली भारत की राष्ट्रीय प्राथमिकता है और यह सतत भूमि प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण, जलवायु कार्रवाई तथा ग्रामीण विकास के प्रयासों का अभिन्न हिस्सा है।

मंगोलिया के उलानबटार में संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम सम्मेलन (UNCCD) के 17वें सम्मेलन (COP17) में IUCN द्वारा आयोजित एक साइड इवेंट को संबोधित करते हुए यादव ने कहा कि भारत भूमि बहाली को किसी एक कार्यक्रम तक सीमित हस्तक्षेप के रूप में नहीं, बल्कि टिकाऊ और लचीले विकास के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखता है।

मंत्री ने बताया कि भारत बॉन चैलेंज के प्रमुख वैश्विक प्रतिबद्धता वाले देशों में शामिल है। भारत ने 2015 में क्षरित और वनों से वंचित भूमि को बहाल करने की प्रारंभिक प्रतिबद्धता जताई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 2030 तक 2.6 करोड़ हेक्टेयर कर दिया गया।

2011-2020 के दौरान 21.76 मिलियन हेक्टेयर भूमि बहाल

भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत ने हाल ही में बॉन चैलेंज पर अपनी दूसरी प्रगति रिपोर्ट जारी की है, जिसमें 2011 से 2020 की अवधि को शामिल किया गया है। इस दौरान देश में 21.76 मिलियन हेक्टेयर (2.176 करोड़ हेक्टेयर) भूमि को बहाली के दायरे में लाया गया।

उन्होंने बताया कि इस प्रयास से लगभग 1.22 अरब मानव-दिवस रोजगार भी सृजित हुआ। इससे पता चलता है कि भूमि बहाली न केवल पर्यावरणीय लाभ देती है, बल्कि रोजगार पैदा करने और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उन्होंने कहा कि आकलन केवल बहाल की गई भूमि के क्षेत्रफल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें वन, कृषि, मृदा एवं जल संरक्षण तथा अन्य भूमि उपयोग प्रणालियों में किए गए बहाली कार्यों को भी शामिल किया गया है।

2021-2025 के लिए अगली रिपोर्टिंग प्रक्रिया जारी

मंत्री ने कहा कि पिछली रिपोर्टिंग प्रक्रिया ने भूमि बहाली के परिणामों, वित्तीय प्रवाह और आजीविका पर प्रभाव की निगरानी प्रणालियों को और मजबूत करने की आवश्यकता को सामने रखा है।

इसी दिशा में भारत 2021-2025 की अवधि के लिए अगली रिपोर्टिंग प्रक्रिया पर काम कर रहा है। यह कार्य सतत भूमि प्रबंधन पर ICFRE सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और IUCN के सहयोग से किया जा रहा है।

इस रिपोर्टिंग चक्र में तीन प्रमुख पहलुओं पर ध्यान दिया जाएगा:

  • बहाल की गई भूमि का क्षेत्रफल
  • भूमि बहाली के लिए वित्तीय प्रवाह
  • सृजित रोजगार

यादव ने कहा कि किसी भी प्रतिबद्धता की विश्वसनीयता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। इसलिए भारत ने भूमि बहाली को लागू करने के लिए बहु-क्षेत्रीय और लैंडस्केप आधारित दृष्टिकोण अपनाया है।

ग्रीन इंडिया मिशन और नगर वन योजना से बढ़ावा

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ग्रीन इंडिया मिशन वन और वृक्ष आवरण, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं तथा जलवायु लचीलेपन को मजबूत कर रहा है।

वहीं, प्रतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (CAMPA) के माध्यम से प्रतिपूरक वनीकरण और संबंधित भूमि बहाली गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि नगर वन योजना के माध्यम से शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में शहरी वानिकी तथा हरित क्षेत्रों के विकास के जरिए भूमि बहाली के प्रयासों को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा जलग्रहण विकास, कृषि वानिकी, मृदा एवं जल संरक्षण तथा समुदाय आधारित बहाली कार्यक्रम भी देशभर में चलाए जा रहे हैं।

2030 के बाद बेहतर और टिकाऊ बहाली पर जोर

यादव ने कहा कि भूमि बहाली किसी एक कार्यक्रम या क्षेत्र के जरिए संभव नहीं है। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों, लैंडस्केप और शासन के विभिन्न स्तरों के बीच समन्वय जरूरी है।

उन्होंने कहा कि 2030 के बाद भारत का लक्ष्य केवल अधिक भूमि बहाल करना नहीं, बल्कि बेहतर तरीके से बहाली करना, बेहतर वित्त उपलब्ध कराना और इसके मापनीय एवं दीर्घकालिक परिणाम सुनिश्चित करना होना चाहिए।

इसके लिए नवीन वित्तीय तंत्र के जरिए सार्वजनिक और निजी निवेश बढ़ाने, क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय साझेदारी मजबूत करने तथा स्थानीय समुदायों की निरंतर भागीदारी सुनिश्चित करने की जरूरत है।

मंत्री ने कहा कि भूमि बहाली को लंबे समय तक बनाए रखने में उन लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका है जो इन क्षेत्रों पर निर्भर हैं और उनका प्रबंधन करते हैं।

भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत बड़े स्तर पर भूमि बहाली को आगे बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत का अनुभव दिखाता है कि मजबूत संस्थानों, निरंतर वित्तपोषण, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, प्रभावी निगरानी और विभिन्न क्षेत्रों के बीच साझेदारी के जरिए महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को मापनीय परिणामों में बदला जा सकता है।

-PIB