भारत ने पहली तिमाही में लगभग 10 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्मार्टफोन का किया निर्यात

भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में स्मार्टफोन निर्यात के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही के दौरान देश का स्मार्टफोन निर्यात लगभग 10 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें सबसे बड़ा योगदान एप्पल आईफोन की शिपमेंट का रहा।

अप्रैल-जून अवधि के दौरान मूल्य के आधार पर स्मार्टफोन निर्यात 23.4 प्रतिशत बढ़कर 9.84 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 7.97 अरब डॉलर था। इस दौरान भारत से निर्यात होने वाले स्मार्टफोन के लिए अमेरिका सबसे बड़ा बाजार बना रहा, जहां भारत में निर्मित डिवाइसों की मजबूत मांग देखने को मिली।

स्मार्टफोन निर्यात के शानदार प्रदर्शन का असर देश के कुल इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात पर भी पड़ा। अप्रैल-जून अवधि में कुल 15.2 अरब डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स सामान के निर्यात में अकेले स्मार्टफोन की हिस्सेदारी 64.8 प्रतिशत रही।

भारत की निर्यात बास्केट में स्मार्टफोन लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में ‘मेड इन इंडिया’ स्मार्टफोन की शिपमेंट में 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि निर्यात में 28 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया। देश में निर्मित कुल स्मार्टफोन में से लगभग एक-तिहाई स्मार्टफोन निर्यात किए गए।

इस वृद्धि में एप्पल के मैन्युफैक्चरिंग साझेदार सबसे बड़े योगदानकर्ता रहे। होन हाई टेक्नोलॉजी ग्रुप (फॉक्सकॉन) का निर्यात 2025 में आईफोन की मजबूत शिपमेंट के चलते सालाना आधार पर 48 प्रतिशत बढ़ा। वहीं, सैमसंग ने भी अपने निर्यात योगदान में बढ़ोतरी करते हुए 4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।

इस साल की शुरुआत में भारत से आईफोन का निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 2 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जिससे एप्पल सभी उत्पाद श्रेणियों में देश का सबसे बड़ा एकल ब्रांडेड निर्यातक बन गया। पूरे वित्त वर्ष के दौरान भारत से कुल स्मार्टफोन निर्यात लगभग 2.6 लाख करोड़ रुपए रहा, जिसमें आईफोन की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से अधिक (करीब 22 अरब डॉलर) रही।

स्मार्टफोन विनिर्माण और निर्यात में इस तेज विस्तार को सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना, विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) में किए गए सुधारों, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए बढ़ाए गए बजटीय समर्थन और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों में हाल में दी गई ढील से मजबूती मिली है। इन कदमों का उद्देश्य भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में और अधिक मजबूत बनाना है। (इनपुट-आईएएनएस)

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