भारत फरवरी 2026 में अगला एआई इम्पैक्ट समिट आयोजित करेगा। यह घोषणा आज सोमवार को केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने की। इस शिखर सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की सुरक्षा और इसके प्रभाव पर चर्चा होगी। पिछला संस्करण पेरिस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सह-अध्यक्षता में हुआ था। इस तैयारी के तहत नीति आयोग ने देशभर के जिलों में एआई एप्लिकेशंस की बेहतरीन प्रथाओं को दिखाने के लिए एक विशेष सम्मेलन आयोजित किया। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि एआई आधारित पहल से शिक्षा में सीखने के नतीजे बेहतर हुए हैं, कृषि को मजबूती मिली है और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ी है।
इस मौके पर नीति आयोग और नीति फ्रंटियर टेक हब ने “एआई फॉर विकसित भारत : द अपॉर्च्युनिटी फॉर एक्सेलेरेटेड इकोनॉमिक ग्रोथ” रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में बताया गया है कि एआई का इस्तेमाल भारत की अर्थव्यवस्था में तेजी लाने का अहम साधन हो सकता है। अनुमान है कि एआई को अपनाने और शोध में नवाचार से 2035 तक भारत की अनुमानित जीडीपी 6.6 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 8.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकती है। नीति आयोग के सीईओ बी.वी.आर. सुब्रह्मण्यम ने कहा कि एआई भारत को 8 प्रतिशत से अधिक की विकास दर हासिल करने और इसे लंबे समय तक बनाए रखने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, उद्योगों में एआई का व्यापक इस्तेमाल 30-35 प्रतिशत तक विकास को बढ़ावा देगा, जबकि एआई आधारित रिसर्च और डेवलपमेंट 20-30 प्रतिशत और योगदान करेगा।
रिपोर्ट में बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) को ऐसे क्षेत्र बताया गया है जिन्हें एआई के तुरंत लाभ मिलेंगे। अनुमान है कि 2035 तक एआई से वित्तीय सेवाओं में 50-55 बिलियन अमेरिकी डॉलर और विनिर्माण क्षेत्र में 85-100 बिलियन अमेरिकी डॉलर का अतिरिक्त मूल्य जुड़ेगा। भविष्य में एआई का उपयोग दवा खोज, ऑटोमोबाइल कॉम्पोनेन्ट्स और सॉफ्टवेयर आधारित वाहनों में बड़े अवसर पैदा करेगा।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि एआई भी इंटरनेट की तरह जीवन, कामकाज और उपभोग के तौर-तरीकों को पूरी तरह बदल देगा। उन्होंने बताया कि भारत इस क्षेत्र में अग्रणी बनने के लिए तैयार है और सरकार रिसर्च, डेवलपमेंट और टैलेंट पाइपलाइन पर जोर दे रही है। मंत्री ने सेमीकंडक्टर मिशन का उदाहरण देते हुए कहा कि देशभर की 278 संस्थाएं छात्रों को आधुनिक सेमीकंडक्टर डिजाइन टूल्स पर प्रशिक्षण दे रही हैं। मोहाली स्थित सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला में पहले से कई चिप्स का निर्माण भी किया जा चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई, सेमीकंडक्टर, टेलीकॉम, बायोटेक और अन्य महत्वपूर्ण तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करना भारत को आने वाले दशकों में वैश्विक प्रौद्योगिकी नेता बनाने में मदद करेगा।


