भारत-ब्रिटेन CETA : भारतीय मछुआरों की वैश्विक बाजारों तक बढ़ेगी पहुंच, समुद्री उत्पादों की निर्यात को बढ़ावा

भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच सम्पन्न व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (Comprehensive Economic and Trade Agreement – CETA) भारतीय मछली पालन और जलीय कृषि क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होने जा रहा है। यह ऐतिहासिक समझौता पीएम मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के बीच आज गुरुवार को लंदन में हुआ। गौरतलब है कि भारत दुनिया के कुल मछली उत्पादन में 7.96% का योगदान देता है और यह क्षेत्र लगभग 2.8 करोड़ लोगों की आजीविका का आधार है। ऐसे में यह समझौता मछुआरों के लिए नया अवसर लेकर आने की संभावना है।

इस समझौते के तहत भारत को ब्रिटेन के 3 बिलियन अमेरिकी डॉलर के मत्स्य बाजार तक प्राथमिकता के साथ पहुंच मिलेगी और टैरिफ (आयात शुल्क) समाप्त कर दिए जाएंगे। इससे खास तौर पर उन भारतीय निर्यातकों को लाभ मिलेगा जो झींगा (श्रिंप) और अन्य सीफूड उत्पाद ब्रिटेन भेजते हैं, जहां इनकी मांग काफी अधिक है।

CETA के जरिए भारत से मछली और समुद्री उत्पादों के निर्यात में तेजी आएगी, जिससे सीधे तौर पर आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा और महाराष्ट्र जैसे समुद्री राज्यों के मछुआरों को लाभ होगा। इन राज्यों के लाखों मछुआरों को न सिर्फ बेहतर कीमत मिलेगी, बल्कि उनकी आजीविका भी अधिक स्थिर और समृद्ध होगी। यह समझौता भारत के मछली निर्यात को मजबूती, तटीय क्षेत्रों में आर्थिक विकास को बढ़ावाऔर भारतीय मत्स्य उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता को बढ़ाएगा।

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