भारत और ब्रिटेन के बीच सम्पन्न व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) भारतीय लघु और मध्यम उद्यमों (SMEs) को वैश्विक बाजारों में मजबूती देने वाला एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। यह ऐतिहासिक समझौता पीएम मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के बीच आज गुरुवार को लंदन में हुआ। ये समझौता उन लाखों छोटे उद्योगों के लिए फायदेमंद साबित होगा जो भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। वर्ष 2022-23 में भारतीय GDP में SMEs का योगदान लगभग 30.1% रहा, जबकि 2024-25 में भारत के कुल निर्यात में इसका हिस्सा 45.8% तक पहुंच गया।
इस समझौते के तहत SMEs को कई बड़े लाभ मिलेंगे, जैसे कस्टम प्रक्रियाओं का तेज निपटारा, डिजिटल प्रणाली और पेपरलेस ट्रेड को मान्यता देने की व्यवस्था, और SMEs के लिए समर्पित अध्याय की स्थापना। CETA के तहत एक विशेष SME संपर्क बिंदु भी स्थापित किया जाएगा, जिससे भारत और UK के बीच बेहतर समन्वय और संवाद संभव होगा, और इससे इन उद्योगों को नया विस्तार मिलेगा। इसके अलावा, SMEs को कम टैरिफ (शुल्क) और बेहतर बाजार पहुंच से फायदा होगा। भारत और UK के बीच व्यापार शिक्षा, वित्तीय सेवाएं, डिजिटल कौशल, व्यावसायिक आधारभूत संरचना और अन्य क्षेत्रों में सहयोग SMEs के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा।
CETA के तहत स्थापित “वर्किंग ग्रुप ऑन गवर्नमेंट प्रोक्योरमेंट” और “इनोवेशन” SMEs को सरकारी खरीद और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भागीदारी के अवसर उपलब्ध कराएंगे। इससे छोटे और मध्यम व्यवसायों को बड़े कॉन्ट्रैक्ट, सरकारी परियोजनाएं और नई तकनीकों में शामिल होने का मौका मिलेगा। यह समझौता भारतीय SMEs को न केवल घरेलू स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे वे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भी प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे।


