भारत-ब्रिटेन CETA से रोजगार के अवसरों में होगा बड़ा इजाफा, भारतीय श्रमिकों को लाभ

भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच सम्पन्न आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) भारतीय श्रमिकों, युवाओं और महिलाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोलने जा रहा है। यह ऐतिहासिक समझौता पीएम मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के बीच आज गुरुवार को लंदन में हुआ। इस समझौते से रोजगार में वृद्धि, लैंगिक समानता और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इस समझौते के तहत रत्न और आभूषण, कपड़ा, लेदर, जूता और खाद्य प्रसंस्करण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों से भारतीय उत्पादों पर शुल्क तत्काल हटाया जाएगा। इससे इन क्षेत्रों में काम कर रहे लाखों श्रमिकों को सीधा लाभ मिलेगा और देश में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे।

CETA केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त श्रमिक अधिकारों का समर्थन भी करता है। इससे श्रमिकों को श्रम कानूनों के बारे में अधिक जानकारी मिलेगी और वे निष्पक्ष न्यायाधिकरणों के माध्यम से अपने अधिकारों की रक्षा कर सकेंगे। यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सभी के लिए सुलभ होगी।

महिलाओं और युवाओं के लिए विशेष अवसर

यह समझौता भारत और UK दोनों में महिलाओं और युवाओं के लिए विशेष प्रावधानों के साथ एक नया रास्ता खोलता है। यह महिला उद्यमियों, युवा व्यवसायियों और हाशिए पर रह रहे समूहों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार, डिजिटल नवाचार और सरकारी खरीद जैसे क्षेत्रों में भागीदारी का अवसर प्रदान करता है। इसके तहत दोनों देश वित्तीय सेवाओं में सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करेंगे, डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देंगे और लैंगिक उत्तरदायी मानकों को अपनाने में सहयोग करेंगे। इससे महिला व्यवसायियों और युवाओं को नए बाजारों तक पहुंच, महत्वपूर्ण जानकारी और बराबरी का अवसर मिलेगा।

समझौते के तहत बनाए गए विशेष कार्य समूह भेदभावपूर्ण प्रथाओं को दूर करने, विविधता को बढ़ावा देने और लैंगिक समानता के लिए काम करेंगे। यह व्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि CETA के लाभ समावेशी और व्यापक हों। CETA के माध्यम से दोनों देश कौशल विकास और श्रमिकों की क्षमता निर्माण में भी सहयोग करेंगे। इसके अलावा, भारतीय श्रमिकों को यूके में रखरखाव, मरम्मत और पर्यटन गाइड जैसी सेवाओं में बेहतर गतिशीलता के अवसर मिलेंगे।

CETA से विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के नए द्वार खुलेंगे, महिलाओं और युवाओं को बराबरी का मौका मिलेगा, जिससे भारत की सामाजिक-आर्थिक प्रगति को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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