भारतीय नौसेना को मिली पहली स्वदेशी एंटी-सबमरीन युद्धपोत ‘अर्नाला’

देश की समुद्री ताकत को बढ़ावा देते हुए भारतीय नौसेना को गुरुवार को पहली स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) ‘अर्नाला’ सौंप दी गई। ‘अर्नाला’ आठ ऐसे युद्धपोतों की श्रृंखला में पहली है, जिसे कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने डिजाइन किया है। इसे तमिलनाडु के कट्टुपल्ली स्थित L&T शिपयार्ड में तैयार किया गया है। इसे 8 मई को भारतीय नौसेना को औपचारिक रूप से सौंपा गया।

‘अर्नाला’ युद्धपोत की लंबाई 77 मीटर है और यह डीजल इंजन-वॉटरजेट संयोजन से संचालित होने वाला भारतीय नौसेना का सबसे बड़ा युद्धपोत है। यह युद्धपोत समुद्र के नीचे निगरानी, खोज और बचाव कार्यों (Search & Rescue), कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों (Low Intensity Maritime Operations) और तटीय क्षेत्रों में एंटी-सबमरीन ऑपरेशन्स को अंजाम देने में सक्षम है। इसके साथ ही इसमें आधुनिक माइन बिछाने (mine laying) की भी क्षमता है।

‘अर्नाला’ का नाम महाराष्ट्र के वसई के पास स्थित ऐतिहासिक अर्नाला किले के नाम पर रखा गया है, जो भारत की समृद्ध समुद्री विरासत का प्रतीक है। इस युद्धपोत का निर्माण इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (IRS) के नियमों के तहत किया गया है और यह GRSE तथा L&T शिपयार्ड के सार्वजनिक-निजी साझेदारी (PPP) के तहत एक उदाहरण है कि कैसे रक्षा उत्पादन में सहयोगात्मक प्रयास सफल हो सकते हैं।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ‘अर्नाला’ में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत देश की स्वदेशी युद्धपोत निर्माण क्षमता को दर्शाता है। इस जहाज की तैनाती से भारतीय नौसेना की तटीय पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता (shallow water ASW capability) को काफी मजबूती मिलेगी।-(ANI)