वित्त वर्ष 2027 (FY27) में भारत का कैपिटल अकाउंट सरप्लस बढ़कर 105 अरब डॉलर (जीडीपी का 2.6%) हो सकता है। विदेशी पूंजी प्रवाह में मजबूत वृद्धि, बढ़ते एफडीआई, पोर्टफोलियो निवेश और बाहरी वाणिज्यिक उधार (ECB) को इस वृद्धि का मुख्य कारण बताया गया है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFS) की एक नई रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, सेवा निर्यात और विदेशी प्रेषण (रेमिटेंस) में लगातार मजबूती भारत के बाहरी क्षेत्र को मजबूत बना रही है। देश में हर महीने औसतन 16-17 अरब डॉलर का सेवा व्यापार अधिशेष (सर्विस ट्रेड सरप्लस) दर्ज किया जा रहा है, जो माल व्यापार के घाटे को काफी हद तक संतुलित करता है।
प्रमुख अनुमान
– सेवा निर्यात: FY27 की पहली तिमाही में 6.2% की बढ़ोतरी के साथ 103.4 अरब डॉलर पहुंचा।
– मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट: FY27 में बढ़कर 406 अरब डॉलर (जीडीपी का 9.9%) होने की संभावना।
– करंट अकाउंट डेफिसिट: मामूली बढ़कर 60 अरब डॉलर (जीडीपी का 1.5%) रहने का अनुमान।
– कुल BoP सरप्लस: लगभग 45 अरब डॉलर (जीडीपी का 1.1%)।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और सरकार की हालिया पहल से 75-80 अरब डॉलर का अतिरिक्त विदेशी पूंजी प्रवाह आने की उम्मीद है। इसके अलावा ग्लोबल बॉन्ड इंडेक्स में भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों के और शामिल होने से 15-20 अरब डॉलर का पैसिव फ्लो भी आ सकता है।
सकारात्मक फैक्टर
मोतीलाल ओसवाल ने भारत-UK कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) को भी महत्वपूर्ण बताया, जो 15 जुलाई 2026 से लागू हो गया है। इस समझौते से भारत के बाहरी क्षेत्र को संरचनात्मक बढ़ावा मिलेगा। रिपोर्ट में कहा गया, “पूंजी प्रवाह में मजबूत रिकवरी की उम्मीद है, जिससे FY27 में कैपिटल अकाउंट सरप्लस 105 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।”
विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ता विदेशी निवेश, सेवा क्षेत्र की मजबूती और मुक्त व्यापार समझौतों का विस्तार भारत की बाहरी अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाएगा। यह स्थिति रुपये पर दबाव कम करने और विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने में भी मददगार साबित होगी। (इनपुट-एजेंसी)


