केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत का सेमीकंडक्टर मिशन अब नई दिशा में प्रवेश कर चुका है, जहाँ सरकारी प्रोत्साहन के साथ-साथ निजी निवेश भी खुद आने लगा है।
उन्होंने यह बात सिंगापुर में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कही।
वैष्णव ने कहा कि भारत के पास मजबूत डिज़ाइन इकोसिस्टम और बड़ी इंजीनियरिंग प्रतिभा मौजूद है, जिसने वैश्विक चिप कंपनियों के बीच भरोसा बनाया है।
उन्होंने कहा, “भारत की सेमीकंडक्टर ड्राइव अब उस मोड़ पर है जहाँ निजी पूंजी खुद बाजार में उतरने लगी है”।
2032 तक वैश्विक स्तर का निर्माण लक्ष्य
मंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य है कि 2031–32 तक सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता उन देशों के स्तर पर पहुंच जाए, जिन्होंने आज वैश्विक नेतृत्व स्थापित किया है।
उन्होंने बताया कि भारत अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन सरकार ने बड़े पैमाने पर निवेश बढ़ाया है ताकि चिप डिज़ाइन, पैकेजिंग और मैन्युफैक्चरिंग को गति मिल सके।
सरकार की प्रोत्साहन नीतियों का प्रभाव
सरकार के 10 अरब डॉलर (लगभग ₹83,000 करोड़) के इंसेंटिव पैकेज से कई बड़े प्रोजेक्ट शुरू हुए हैं।
• माइक्रॉन टेक्नोलॉजी गुजरात में प्लांट स्थापित कर चुकी है
• टाटा समूह समेत 10 कंपनियाँ देश में चिप निर्माण की तैयारी कर रही हैं
• तीन सेमीकंडक्टर प्लांट अगले साल से वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करेंगे
वैष्णव ने कहा कि सरकार की नीति निजी क्षेत्र के लिए वह माहौल तैयार कर रही है, जैसा ऐप्पल और उसके सप्लायर्स के लिए उत्पादन प्रोत्साहन के तहत बनाया गया था।
तकनीक की पहुंच सबके लिए
उन्होंने बताया कि भारत का लक्ष्य है कि कंप्यूटिंग क्षमता और तकनीक लोगों के लिए सुलभ और सस्ती हो।
मंत्री ने कहा, “कॉमन और अफॉर्डेबल कंप्यूट सुविधा तकनीक का लोकतंत्रीकरण सुनिश्चित कर रही है”।


