प्रतिक्रिया | Thursday, April 03, 2025

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भारत की कल्चरल डिप्लोमेसी का दुनिया में डंका, वैश्विक संबंधों के लिए साबित हुई ‘बूस्टर डोज’  

भारत अपनी समृद्ध विरासत, आध्यात्मिक धरोहर और सांस्कृतिक विविधता के साथ हमेशा से अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। वहीं बीते कुछ वर्षों से देश में पर्यटन क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिल रहा है। तीसरे कार्यकाल में मोदी सरकार “ज्ञान ही शक्ति है”, संदेश को चरितार्थ करते हुए देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को बढ़ावा देने के साथ-साथ मजबूत वैश्विक सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने पर रणनीतिक तौर भी पर मजबूत इच्छाशक्ति के साथ आगे बढ़ रही है। परिणामस्वरूप नवोन्मेषी पहलों, बुनियादी ढांचे के विकास और डिजिटल आउटरीच के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत को एक प्रमुख वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में फिर से स्थापित करने में कामयाब रहे हैं।

भारत की विरासत के वर्तमान ध्वजवाहक

पर्यटन विकास के क्रम में पीएम मोदी का विजन सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने से कहीं आगे बढ़ चुका है। पाीएम मोदी को अब भारत की विरासत के ध्वजवाहक के तौर पर देखा जा रहा है। जहां एक ओर देखो अपना देश, स्वदेश दर्शन और प्रसाद (तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक विरासत संवर्धन अभियान) जैसी प्रमुख पहलों ने भारत के प्राचीन आध्यात्मिक स्थलों को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है वहीं बीते दिनों में पीएम मोदी का पूरा जोर आध्यात्मिक, सांस्कृतिक पर्यटन के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देते हुए भारत की सांस्कृतिक धरोहरों को दुनिया के सामने फिर से पेश करने पर केंद्रित दिखता है। 

  आइकॉनिक हेरिटेज साइट्स का पुनरुद्धार: वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और गुजरात में सोमनाथ मंदिर जैसे प्रतिष्ठित विरासत स्थलों के जीर्णोद्धार और संवर्धन में सरकार के निरंतर प्रयासों ने इन स्थानों से जुड़े सांस्कृतिक गौरव को पुनर्जीवित किया है। केदारनाथ और चार धाम यात्रा के बुनियादी ढांचे के पुनरुद्धार ने लाखों लोगों के लिए तीर्थयात्रा का अनुभव सुगम बनाया है।

 आध्यात्मिक पर्यटन पर ध्यान: प्रधानमंत्री मोदी के आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के क्रम में किए जा रहे प्रयासों से भारत की कई धर्मों की जन्मभूमि के रूप में मान्यता और मज़बूत हुई है। बौद्ध सर्किट का पुनरुद्धार, रामायण और कृष्ण सर्किट का प्रचार, सूफी और सिख सर्किट के विकास ने बड़ी संख्या में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय तीर्थयात्रियों को आकर्षित किया है। यही वजह है कि भारत विश्वपटल पर ‘विश्वगुरु’ के रूप में स्थापित होता दिख रहा है। 

पर्यटन विकास को बढ़ावा देने वाली ऐतिहासिक पहल

 देखो अपना देश अभियान: यह पहल भारतीयों को अपने देश की सांस्कृतिक विविधिता और विरासत को नजदीक से जानने-पहचानने के लिए प्रोत्साहित करती है। इस अभियान ने ऐसे ऐतिहासिक, धार्मिक स्थलों को दोबारा से पहचान दिलाई है जो कालांतर में अनदेखी के चलते बदहाल हो चुके थे. अभियान ने घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने में अभूतपूर्व योगदान दिया है।

स्वदेश दर्शन योजना: भारत भर में थीम-आधारित पर्यटन सर्किट विकसित करने के लिए शुरू की गई, स्वदेश दर्शन योजना ने तमाम पौराणिक स्थलों की सांस्कृतिक अखंडता को संरक्षित करते हुए पर्यटन के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने में मदद की है। पूर्वोत्तर सर्किट, बौद्ध सर्किट और डेजर्ट सर्किट जैसे इनीशिएटिव काफी लोकप्रिय हुए।

 प्रसाद योजना: तीर्थ पर्यटन को बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई यह योजना बुनियादी ढांचे में सुधार, स्वच्छता सुनिश्चित करने और स्थायी पर्यटन प्रथाओं को बढ़ावा देकर तीर्थ स्थलों के समग्र विकास पर केंद्रित है।

वैश्विक संबंधों की ‘बूस्टर डोज’ कल्चरल डिप्लोमेसी 

 कल्चरल डिप्लोमेसी के जरिए पीएम मोदी बड़ी ही कुशलता से वैश्विक संबंधों को मजबूत करने वाली ‘बूस्टर डोज’ देने में कामयाब रहे. पीएम मोदी ने वैश्विक कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए भारत की सांस्कृतिक धरोहरों को कुशलतापूर्वक पहचान दिलाई है। योग, आयुर्वेद और भारत की आध्यात्मिक विरासत पर उनके जोर ने मजबूत अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा दिया है। इसको समझने के लिए मोदी सरकार के कुछ फैसलों पर नजर डालना जरूरी है।

सॉफ्ट पॉवर बना अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस: 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र में मोदी का सफल अभियान भारत की सबसे बड़ी सांस्कृतिक कूटनीति सफलताओं में से एक है। योग, जो अब 190 से अधिक देशों में प्रचलित है, भारत की सॉफ्ट पावर का प्रतीक बन गया है।

सांस्कृतिक आदान-प्रदान: अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक उत्सवों और प्रदर्शनियों में भारत की भागीदारी ने वैश्विक स्तर पर इसकी सांस्कृतिक छाप को और गहरा किया है। मिस्र में ‘इंडिया बाय द नाइल’ और ‘नमस्ते रूस’ जैसी पहलों के माध्यम से, भारत ने विदेशों में अपनी समृद्ध विरासत को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया है।

डिजिटल इनोवेशन के साथ विरासत को बढ़ावा

पर्यटन में डिजिटल इंटीग्रेशन के लिए किए गए प्रयासों ने इस क्षेत्र में क्रांति ला दी है। हेरिटेज साइट्स के वर्चुअल टूर की पेशकश करने वाली अतुल्य भारत वेबसाइट और मोबाइल ऐप जैसी पहलों ने भारत की वैश्विक अपील को बढ़ाया है। 160 से अधिक देशों के पर्यटकों के लिए ई-वीज़ा ने वीज़ा प्रक्रिया को सरल बना दिया है, जिससे भारत अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए अधिक सुलभ हो गया है।

ईको-टूरिज्म और सस्टेनेबल पॉलिसी

विकास और सस्टेनेबिलिटी के बीच संतुलन बनाने के लिए, मोदी सरकार ने ईको-टूरिज्म और रेस्पॉंसिबल ट्रेवल को प्राथमिकता दी है। पर्यटन को बढ़ावा देते हुए हिमालय और पश्चिमी घाट जैसे क्षेत्रों में नाजुक पारिस्थितिकी तंत्रों को संरक्षित करने पर जोर देने से विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बना है।

अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन

पर्यटन को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करने से भारत की अर्थव्यवस्था पर सीधा सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। उद्योग के अनुमानों के अनुसार, भारत का पर्यटन क्षेत्र सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 7% का योगदान देता है और 40 मिलियन से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है। हेरिटेज साइट्स और तीर्थ स्थलों के पुनरोद्धार ने स्थानीय लोगों को भी सशक्त बनाया है, जिससे आजीविका के अवसरों का एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बना है।

भविष्य की संभावनाएं? 

पर्यटन विकास को लेकर उठाए ज रहे सरकार के कदमों पर गौर करें तो साफ़ ज़ाहिर होता है कि आध्यात्मिक टूरिज्म के आलावा पीएम मोदी का विज़न एडवेंचर टूरिज्म, मेडिकल टूरिज्म और ग्रामीण पर्यटन जैसे विशिष्ट पर्यटन क्षेत्रों को बढ़ावा देकर भारत को वैश्विक स्तर पर शीर्ष पर्यटन स्थलों में से एक बनाना है। बुनियादी ढांचे, स्मार्ट शहरों का विकास और वंदे भारत जैसी ट्रेनों और आधुनिक हवाई अड्डों के माध्यम से बेहतर कनेक्टिविटी भारत की पर्यटन क्षमता को और बढ़ाएगी। यानी की आने वाले समय में भारत की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी व दुनिया भर में गहरे सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा भी मिलेगा।

सांस्कृतिक समृद्धता के साथ-साथ निवेश भी

मोदी सरकार ने देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पहचान दिलाने और वैश्विक सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रणनीतिक पहल तो की ही हैं साथ ही सरकार ने कोई योजनाओं में अच्छा खासा निवेश भी किया है। हाल के घटनाक्रमों और निर्णयों ने इस पहचान को और मजबूत किया है, जिससे भारत एक प्रमुख वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित हुआ है।

हाल ही में शुरू हुई प्रमुख योजनाएं और बजट

  1. मार्च 2024 में, प्रधानमंत्री मोदी ने देश भर में 52 टूरिज्म इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया. इन योजनाओं में 1,400 करोड़ से अधिक का निवेश किया गया। स्वदेश दर्शन और प्रसाद योजनाओं के तहत विकसित इन परियोजनाओं का उद्देश्य देश भर में पर्यटन को बढ़ाना और तीर्थयात्रा और विरासत स्थलों को बढ़ावा देना है। इन प्रोजेक्ट्स को सभी 52 गंतव्यों में एक साथ लॉन्च करना समग्र पर्यटन विकास के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
  1. पर्यटन की आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देने की क्षमता को पहचानते हुए, नवंबर 2024 में मोदी सरकार ने कुल 3,000 करोड़ रूपए से अधिक की लागत वाली 40 स्थानीय पर्यटन परियोजनाओं को मंजूरी दी। सरकार की इन योजनाओं में केरल के अष्टमुडी बैकवाटर में जैव विविधता और ईको-मनोरंजन केंद्र विकसित करने से लेकर महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग में अंडरवाटर पर्यटन शुरू करना शामिल है।

 सांस्कृतिक कार्यक्रमों और आध्यात्मिक पर्यटन पर जोर

 महाकुंभ 2025: प्रधानमंत्री मोदी ने महाकुंभ को राष्ट्रीय जागरण के क्षण के रूप में पहचान दिलाई। जिसमें युवाओं की भागीदारी ‘मोदी मैजिक’ की पुष्टि करती है। इस आयोजन के सफल आयोजन को भी भारत की बढ़ती सॉफ्ट पावर के तौर पर देखा जा रहा है।

देवभूमि में विंटर टूरिज्म: शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए, प्रधानमंत्री मोदी ने देवी गंगा के शीतकालीन निवास, उत्तरकाशी में मुखवा मंदिर का दौरा किया। यह यात्रा हिमालयी क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने और इसके सांस्कृतिक महत्व को प्रदर्शित करने पर सरकार के फोकस को रेखांकित करती है।

अंतरराष्‍ट्रीय सांस्कृतिक जुड़ाव

मॉरीशस यात्रा: मॉरीशस की अपनी यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने देश के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भाग लिया, जो दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है। इस तरह की यात्राएं द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाती हैं और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देती हैं।

 वैश्विक सांस्कृतिक उपस्थिति: अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी और रणनीतिक सांस्कृतिक कूटनीति ने भारत की वैश्विक सांस्कृतिक उपस्थिति को बढ़ाया है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को मजबूती मिली है।

भारत की विरासत की वैश्विक मान्यता: वर्तमान समय में भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की वैश्विक मान्यता बढ़ी है, जिससे देश को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महाशक्ति के रूप में स्थान मिला है। साथ ही साथ पर्यटन की बढ़ती संभावनाओं के चलते अधिक घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित किया है, जिससे आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में योगदान मिला है।

कुल मिलाकर इन ठोस प्रयासों के माध्यम से, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रशासन भारत की समृद्ध विरासत को बढ़ावा देने, पर्यटन को बढ़ावा देने और सांस्कृतिक कूटनीति को मजबूत करने के लिए वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति को मजबूत कर रहा है।

(लेखक के पास मीडिया जगत में लगभग डेढ़ दशक का अनुभव है, वे प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में काम कर चुके हैं)

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आखरी अपडेट: 3rd Apr 2025