वैश्विक अस्थिरता के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग देश में डर का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे जनता का विश्वास कमजोर होता है। ऐसे प्रयासों के बजाय लोगों में भरोसा पैदा किया जाना चाहिए।
आर्थिक प्रगति पर भरोसा जताया
स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (सिडबी) के फाउंडेशन डे कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने भारत की आर्थिक प्रगति को लेकर “निराशावादी और संशयवादी दृष्टिकोण” फैलाने वालों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस तरह का नजरिया आम नागरिकों की उपलब्धियों और योगदानों को नजरअंदाज करता है।
घरेलू मांग और जीएसटी संग्रह मजबूत
वित्त मंत्री ने कहा कि सभी हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स यह दिखाते हैं कि घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है। सितंबर 2025 में दरों में कटौती के बावजूद जीएसटी संग्रह मजबूत रहा है। वहीं, खुदरा, कृषि और एमएसएमई क्षेत्रों में वाहन बिक्री तथा ऋण वृद्धि भी स्वस्थ स्थिति में है।
निजी निवेश और कंपनियों के मुनाफे में बढ़ोतरी
सीतारमण ने भारतीय उद्योग परिसंघ के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सितंबर 2025 में निजी क्षेत्र के व्यय में सालाना आधार पर 67% की वृद्धि हुई। इसके साथ ही मार्च तिमाही में कंपनियों का लाभ मार्जिन अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
मध्य पूर्व तनाव से बढ़ सकती हैं चुनौतियां
वित्त मंत्री ने कहा कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इससे ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी, शिपिंग लागत में इजाफा और निर्यात में बाधाएं आने की आशंका है। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की व्यापक आर्थिक बुनियाद अब भी मजबूत है। उन्होंने यह भी कहा कि भू-राजनीतिक तनाव कारोबारों के कार्यशील पूंजी चक्र को प्रभावित कर सकता है और निर्यात ऑर्डर को लेकर अनिश्चितता बढ़ा सकता है।
एमएसएमई के लिए कई नई घोषणाएं
सीतारमण ने बताया कि सरकार ने एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें सिडबी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के बीच को-लेंडिंग प्लेटफॉर्म शामिल है, जिसका उद्देश्य ऋण पहुंच का विस्तार करना है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सीजीटीएमएसई योजना के तहत विशेष माइक्रो क्रेडिट कार्ड शुरू किया है। इसके जरिए उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत एमएसएमई को 5 लाख रुपए तक का बिना गारंटी ऋण मिल सकेगा। इसके अलावा, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ईसीएलजीएस 5.0 को मंजूरी दी है, जिससे एमएसएमई क्षेत्र के लिए 2.55 लाख करोड़ रुपए तक के ऋण उपलब्ध हो सकेंगे।
उत्पाद शुल्क कटौती से राजस्व पर असर
वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी से उपभोक्ताओं और कारोबारों को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती की गई है। इसके कारण सरकार को वित्त वर्ष 2027 में करीब 1 लाख करोड़ रुपए के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। (इनपुट: आईएएनएस)


