भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को बड़ा प्रोत्साहन, ₹5,532 करोड़ के प्रोजेक्ट्स को मिली हरी झंडी

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण (manufacturing) क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ गया है। सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत ₹5,532 करोड़ के पहले 7 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं से ₹44,406 करोड़ का उत्पादन और 5,195 नई नौकरियाँ सृजित होने की उम्मीद है।

यह घोषणा केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने की, जो भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का लक्ष्य है कि देश में उच्च-मूल्य वाले कंपोनेंट्स का मजबूत घरेलू आधार तैयार किया जाए ताकि बड़े पैमाने पर विनिर्माण को प्रोत्साहन मिल सके।

योजना का उद्देश्य (Scheme Overview):

ECMS योजना को 8 अप्रैल 2025 को ₹22,919 करोड़ के बजट के साथ अधिसूचित किया गया था। इसकी अवधि छह वर्ष है (एक वर्ष की वैकल्पिक तैयारी अवधि के साथ)। इस योजना का उद्देश्य भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स निर्माण के लिए आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र (self-sustaining ecosystem) विकसित करना है।

इस योजना के तहत घरेलू और विदेशी निवेश को आकर्षित कर भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापार का प्रमुख केंद्र बनाने पर ध्यान दिया गया है।

30 सितंबर 2025 तक, योजना के अंतर्गत निवेश वादे ₹1.15 लाख करोड़ तक पहुँच गए हैं, जो प्रारंभिक लक्ष्य से लगभग दोगुना हैं। अगले छह वर्षों में ₹10.34 लाख करोड़ का उत्पादन होने की उम्मीद है और 1.4 लाख से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियाँ सृजित होने का अनुमान है।

पहले चरण में स्वीकृत उत्पाद (Products Approved):

इन प्रोजेक्ट्स के तहत कई उच्च-मूल्य वाले कंपोनेंट्स और सामग्रियों के निर्माण को मंजूरी दी गई है, जो स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल, मेडिकल डिवाइस, टेलीकॉम और औद्योगिक प्रणालियों में उपयोग होते हैं।

  • कैमरा मॉड्यूल सब-असेंबली – स्मार्टफोन, ड्रोन, मेडिकल उपकरण और रोबोट में उपयोग।

  • मल्टी-लेयर PCB (Printed Circuit Board) – ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और औद्योगिक नियंत्रणों में अहम।

  • HDI PCB (High Density Interconnect) – उच्च प्रदर्शन और कॉम्पैक्ट डिजाइन वाले उपकरणों जैसे स्मार्टफोन, वियरेबल्स और मेडिकल डिवाइस के लिए।

  • कॉपर क्लैड लैमिनेट (Laminate) – मल्टी-लेयर PCB निर्माण का आधार।

  • पॉलीप्रोपाइलीन फिल्म – कैपेसिटर निर्माण में प्रमुख कच्चा माल।

राज्यों में परियोजनाएँ (Project Locations):

कंपनी का नाम उत्पाद स्थान निवेश (₹ करोड़) उत्पादन (₹ करोड़) रोजगार
Kaynes Circuits India Pvt. Ltd. Multi-Layer PCB तमिलनाडु 104 4,300 220
Kaynes Circuits India Pvt. Ltd. Camera Module Sub-Assembly तमिलनाडु 325 12,630 480
Kaynes Circuits India Pvt. Ltd. HDI PCB तमिलनाडु 1,684 4,510 1,480
Kaynes Circuits India Pvt. Ltd. Laminate तमिलनाडु 1,167 6,875 300
SRF Limited Polypropylene Film मध्य प्रदेश 496 1,311 225
Syrma Strategic Electronics Pvt. Ltd. Multi-Layer PCB आंध्र प्रदेश 765 6,933 955
Ascent Circuits Pvt. Ltd. Multi-Layer PCB तमिलनाडु 991 7,847 1,535
कुल     5,532 44,406 5,195

भारत  का  इलेक्ट्रॉनिक्स  निर्यात (Electronics Exports):

भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 2024–25 में तीसरा सबसे बड़ा और सबसे तेज़ी से बढ़ता हुआ निर्यात क्षेत्र बन गया है।

  • इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन ₹1.9 लाख करोड़ (2014–15) से बढ़कर ₹11.3 लाख करोड़ (2024–25) तक पहुँचा।

  • निर्यात ₹38,000 करोड़ से बढ़कर ₹3.27 लाख करोड़, यानी 8 गुना वृद्धि

  • पिछले 10 वर्षों में 25 लाख रोजगार सृजित हुए।

मोबाइल  निर्माण  ने  बदली  तस्वीर:

  • मोबाइल उत्पादन ₹18,000 करोड़ (2014–15) से बढ़कर ₹5.45 लाख करोड़ (2024–25)28 गुना वृद्धि।

  • भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता है — जहाँ 2014 में केवल 2 इकाइयाँ थीं, अब 300 से अधिक हैं।

  • मोबाइल निर्यात ₹1,500 करोड़ (2014–15) से बढ़कर ₹2 लाख करोड़ (2024–25)127 गुना वृद्धि।

  • Apple ने 2024 में ही ₹1.1 लाख करोड़ के iPhones निर्यात किए।

भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र अब आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में निर्णायक मोड़ पर है। ECMS के तहत प्रोजेक्ट्स की मंजूरी न केवल औद्योगिक दृष्टि से अहम है, बल्कि यह टेक्नोलॉजी उत्पादन में भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में रणनीतिक कदम है।

निवेश, उत्पादन और रोजगार के बढ़ते आँकड़े इस बात का संकेत हैं कि भारत अब “मेक इन इंडिया” से “मेक फॉर वर्ल्ड” की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में यह छलांग भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक मजबूत कदम है।