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भारत का ऊर्जा क्षेत्र: जलविद्युत, हरित हाइड्रोजन और परमाणु ऊर्जा से मजबूत हो रही ऊर्जा सुरक्षा

भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ एक सुरक्षित, टिकाऊ और विविध ऊर्जा व्यवस्था विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जलविद्युत, हरित हाइड्रोजन, परमाणु ऊर्जा और भू-तापीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में क्षमता विस्तार के साथ देश ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्यों को मजबूत कर रहा है।

जलविद्युत बना नवीकरणीय ऊर्जा का अहम आधार

जलविद्युत विश्वसनीय और लचीली बिजली उत्पादन क्षमता उपलब्ध कराती है। सौर और पवन ऊर्जा की क्षमता बढ़ने के साथ यह ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

31 जुलाई 2026 तक भारत की कुल जलविद्युत क्षमता 57.24 GW हो गई है, जिसमें बड़ी और छोटी दोनों जलविद्युत परियोजनाएं शामिल हैं।

सरकार ने मार्च 2026 में लघु जलविद्युत विकास योजना को मंजूरी दी है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू होगी और इसके लिए ₹2,584.60 करोड़ का परिव्यय निर्धारित किया गया है।

योजना के तहत 1 से 25 मेगावाट क्षमता वाली परियोजनाओं के जरिए लगभग 1,500 मेगावाट अतिरिक्त लघु जलविद्युत क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। इसमें विशेष रूप से पहाड़ी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों की परियोजनाओं को समर्थन दिया जाएगा।

हरित हाइड्रोजन से स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा

हरित हाइड्रोजन कठिन क्षेत्रों में उत्सर्जन कम करने वाले स्वच्छ ईंधन के विकल्प के रूप में उभर रहा है। यह ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास में भी योगदान दे सकता है।

सरकार ने 2023 में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन शुरू किया था। जनवरी 2023 में मंजूर इस मिशन के लिए ₹19,744 करोड़ का परिव्यय रखा गया है और 2030 तक 50 लाख मीट्रिक टन (5 MMT) हरित हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

फरवरी 2026 तक देश में लगभग 8,000 टन प्रतिवर्ष हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता स्थापित हो चुकी थी।

जुलाई 2026 में मिशन के तहत 12 पायलट परियोजनाएं शुरू की गईं, जिनके तहत 21 मार्गों पर 70 हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों को शामिल किया गया है।

भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ईंधन सेल से चलने वाली ट्रेन ने जुलाई 2026 में जिंद-सोनीपत खंड पर परिचालन शुरू किया।

परमाणु ऊर्जा क्षमता विस्तार पर जोर

भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी पिछले एक दशक के दौरान क्षमता विस्तार और आधुनिकीकरण पर जोर दिया गया है। स्वदेशी तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा पर ध्यान देते हुए देश अपनी मौजूदा क्षमता के साथ भविष्य की परमाणु ऊर्जा जरूरतों के लिए भी तैयारी कर रहा है।

31 जुलाई 2026 तक भारत की स्थापित परमाणु ऊर्जा क्षमता 8.78 GW थी।

सरकार ने 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 GW तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। स्वदेशी 700 मेगावाट और 1,000 मेगावाट रिएक्टरों के विकास तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ क्षमता के 2031-32 तक 22.38 GW तक पहुंचने का अनुमान है।

छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों पर निवेश

न्यूक्लियर एनर्जी मिशन के तहत छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) के डिजाइन, विकास और तैनाती के लिए ₹20,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

इसके तहत 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी SMR विकसित करने का लक्ष्य है।

वहीं, कलपक्कम में 500 MWe प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने 6 अप्रैल 2026 को पहली क्रिटिकलिटी हासिल की। इसे भारत के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया है।

SHANTI Act से परमाणु क्षेत्र में निजी भागीदारी

सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) Act, 2025 के तहत निजी क्षेत्र को लाइसेंस के माध्यम से परमाणु संयंत्र स्थापित करने तथा परमाणु ऊर्जा के उत्पादन, उपयोग और निपटान से जुड़ी गतिविधियों में भाग लेने की अनुमति दी गई है।

कानून के तहत प्रत्येक परमाणु घटना के लिए अधिकतम देयता 30 करोड़ SDR (Special Drawing Rights) के बराबर रुपये या केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित राशि है।

इस अधिनियम ने Atomic Energy Regulatory Board (AERB) को वैधानिक दर्जा भी दिया है, जिससे इसकी नियामकीय और सुरक्षा संबंधी भूमिका मजबूत हुई है।

भू-तापीय ऊर्जा में भी संभावनाएं

भू-तापीय ऊर्जा सूर्य और पवन जैसी परिवर्तनीय ऊर्जा के पूरक के रूप में एक विश्वसनीय नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत हो सकती है। इसमें पृथ्वी के भीतर मौजूद गर्मी का उपयोग बिजली उत्पादन या सीधे ताप उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है।

भारत ने 15 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय भू-तापीय ऊर्जा नीति अधिसूचित की। इसका उद्देश्य भू-तापीय संसाधनों की खोज, विकास और उपयोग के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार करना है।

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुमान के अनुसार, देश में 381 गर्म जलस्रोतों के अध्ययन के आधार पर लगभग 10,600 MW भू-तापीय क्षमता है। इनमें 42 भू-तापीय क्षेत्र संभावनाशील माने गए हैं।

नीति के तहत तकनीकी साझेदारी, ज्ञान हस्तांतरण और संयुक्त अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। भारत के ऑस्ट्रेलिया, आइसलैंड, सऊदी अरब और अमेरिका के साथ भू-तापीय ऊर्जा के लिए सहयोग तंत्र हैं।

जुलाई-अगस्त 2025 में पांच परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिनमें एक पायलट उत्पादन संयंत्र, संसाधन आकलन परियोजनाएं और सौर-भू-तापीय हाइब्रिड संयंत्र शामिल हैं।

एलपीजी से स्वच्छ खाना पकाने को बढ़ावा

भारत में स्वच्छ खाना पकाने की सुविधा की पहुंच भी लगातार बढ़ी है। राष्ट्रीय एलपीजी कवरेज 2014 के 55.9 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 107.2 प्रतिशत हो गई है।

इसी अवधि में एलपीजी उपभोक्ताओं की संख्या 14.51 करोड़ से बढ़कर 33.18 करोड़ हो गई।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 49.21 करोड़ सिलेंडर रिफिल किए गए। इसी अवधि में 25 लाख अतिरिक्त एलपीजी कनेक्शन मंजूर किए गए, जिनमें से 5 अगस्त 2026 तक 24.84 लाख कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं।

भारत वर्तमान में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा कच्चा तेल रिफाइनर है। देश में 22 परिचालन रिफाइनरियों की कुल स्थापित क्षमता 258.1 मिलियन टन प्रतिवर्ष है।

‘समुद्र मंथन’ से बढ़ेगा अपतटीय तेल-गैस अन्वेषण

सरकार ने 31 जुलाई 2026 को ‘समुद्र मंथन’ राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना को मंजूरी दी। इसके लिए ₹84,084 करोड़ का परिव्यय निर्धारित किया गया है।

योजना का उद्देश्य अपतटीय तेल और गैस की खोज को बढ़ावा देना तथा ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना है। इसके तहत भूकंपीय सर्वेक्षण, गहरे पानी में खोजी ड्रिलिंग और अपतटीय उत्पादन एवं निकासी से जुड़ा बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा।

भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था

भारत एक ऐसी ऊर्जा व्यवस्था तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है जिसमें ऊर्जा सुरक्षा, टिकाऊपन और नवाचार को एक साथ महत्व दिया जा रहा है।

नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के विस्तार के साथ जलविद्युत, हरित हाइड्रोजन, परमाणु ऊर्जा और भू-तापीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश और तकनीकी विकास देश के ऊर्जा मिश्रण को अधिक विविध बनाने में मदद कर सकते हैं।

बढ़ती ऊर्जा मांग के बीच यह विविध ऊर्जा मिश्रण विश्वसनीय बिजली आपूर्ति, बेहतर ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ भविष्य की दिशा में भारत की क्षमता को मजबूत करेगा। नीतिगत समर्थन और तकनीकी प्रगति से भारत की ऊर्जा व्यवस्था को अधिक लचीला, आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

-PIB