राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) ने मोबाइल खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं के लिए भारत की अपनी तरह की पहली प्रत्यायन योजना शुरू की है। नई दिल्ली के होटल अशोक में आयोजित ‘गुणवत्ता समन्वय-बहुपक्षीय एमओयू आदान-प्रदान समारोह’ के दौरान शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य समुदायों के करीब विश्वसनीय, गुणवत्ता-आश्वासन और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप खाद्य परीक्षण सेवाओं की पहुंच बढ़ाना है। कार्यक्रम के दौरान भागीदार संगठनों के बीच बहुपक्षीय समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान भी हुआ, जिससे नियामक अभिसरण, समन्वित मूल्यांकन और एकीकृत गुणवत्ता बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में सहयोग को बढ़ावा मिला।
मोबाइल प्रयोगशालाओं के लिए तैयार किया गया नया ढांचा
भारतीय गुणवत्ता परिषद (क्यूसीआई) के संघटक बोर्ड एनएबीएल की ओर से विकसित यह प्रत्यायन योजना मोबाइल खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं के लिए एक मानकीकृत ढांचा उपलब्ध कराएगी। इसके माध्यम से ऐसी प्रयोगशालाएं समुदायों के करीब विश्वसनीय और गुणवत्ता-आश्वासन वाली खाद्य परीक्षण सेवाएं उपलब्ध करा सकेंगी। योजना में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप परीक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
खाद्य सुरक्षा निगरानी को मिलेगा बढ़ावा
एनएबीएल की इस पहल से पारंपरिक प्रयोगशालाओं से आगे बढ़कर मान्यता प्राप्त खाद्य परीक्षण सेवाओं का विस्तार होने की उम्मीद है। इससे खाद्य सुरक्षा निगरानी को मजबूत करने, गुणवत्ता परीक्षण तक लोगों की पहुंच बढ़ाने और नियामक हस्तक्षेप को अधिक तेज बनाने में मदद मिल सकती है। मोबाइल परीक्षण सुविधाओं के विस्तार से दूरदराज और समुदाय-स्तर पर खाद्य नमूनों की जांच की क्षमता भी बढ़ेगी।
बहुपक्षीय एमओयू से बढ़ेगा नियामक समन्वय
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न भागीदार संगठनों के बीच बहुपक्षीय एमओयू का आदान-प्रदान किया गया। इसके जरिए समन्वित मूल्यांकन, नियामक सामंजस्य और एकीकृत मूल्यांकन ढांचे (आईएएफ) को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। इस व्यवस्था का उद्देश्य अलग-अलग संस्थाओं द्वारा की जाने वाली मूल्यांकन प्रक्रियाओं में दोहराव कम करना और पारस्परिक मान्यता को बढ़ावा देना है।
कारोबार सुगमता को भी मिलेगा लाभ
बहुपक्षीय सहयोग के जरिए नियामक दक्षता में सुधार और उच्च गुणवत्ता एवं अनुपालन मानकों को बनाए रखने पर जोर दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, मूल्यांकन प्रक्रियाओं में बेहतर समन्वय से अनावश्यक दोहराव कम होगा और कारोबार से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सुगम बनाने में मदद मिलेगी। इससे एकीकृत और अधिक प्रभावी गुणवत्ता बुनियादी ढांचे के निर्माण को भी बल मिलेगा।
डीपीआईआईटी सचिव ने गुणवत्ता को विकास की आधारशिला बताया
कार्यक्रम में उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में गुणवत्ता को शामिल करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ‘गुणवत्ता समन्वय’ जैसी पहल गुणवत्ता-संचालित प्रक्रियाओं को बढ़ावा देकर वर्ष 2047 तक भारत की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
एनएबीएल अध्यक्ष ने सहयोगी मूल्यांकन पर दिया जोर
एनएबीएल के अध्यक्ष डॉ. संदीप शाह ने मोबाइल खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं के लिए शुरू की गई प्रत्यायन योजना और एकीकृत मूल्यांकन ढांचे के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने भारत के विकास में सहयोगात्मक मूल्यांकन प्रक्रियाओं और विश्वसनीय संस्थानों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि मजबूत गुणवत्ता व्यवस्था के लिए विभिन्न हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
मजबूत गुणवत्ता पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सहयोग जरूरी
क्यूसीआई के महासचिव चक्रवर्ती टी. कन्नन ने मजबूत गुणवत्ता पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में सहयोग, अभिसरण और पारस्परिक विश्वास के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ‘गुणवत्ता समन्वय’ पहल और मोबाइल खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं के लिए प्रत्यायन योजना मिलकर भारत के गुणवत्ता बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में योगदान देंगी। इससे समुदायों के करीब गुणवत्ता-आश्वासन वाली परीक्षण सेवाएं पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।
गुणवत्ता बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में पहल
‘गुणवत्ता समन्वय’ कार्यक्रम के आयोजन से सहयोगी गुणवत्ता पहलों को आगे बढ़ाने, नियामक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने और हितधारकों के विश्वास को मजबूत करने की दिशा में प्रयासों को बल मिला है। एनएबीएल और क्यूसीआई की इस पहल से भारत में अधिक समन्वित, विश्वसनीय और प्रभावी गुणवत्ता बुनियादी ढांचे के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद है। (इनपुट: पीआईबी)


