विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत निवारण, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत डेटा सेंटर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), क्वांटम प्रौद्योगिकी और अगली पीढ़ी के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में तेजी से वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत का डेटा सेंटर सेक्टर लगभग एक लाख इंजीनियरिंग रोजगार सृजित कर सकता है।
डेटा सेंटर अर्थव्यवस्था में भारत के लिए बड़ा अवसर
एएमसीएचएएम इंडिया द्वारा आयोजित वार्षिक नेतृत्व शिखर सम्मेलन में “भारत के डेटा केंद्रों को भविष्य के लिए तैयार करना: सशक्त आपूर्ति श्रृंखलाएं और अवसर” विषय पर संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत अब डेटा अर्थव्यवस्था को केवल तकनीकी बदलाव के रूप में नहीं, बल्कि एक रणनीतिक राष्ट्रीय अवसर के रूप में देख रहा है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र आने वाले समय में निवेश, रोजगार, ऊर्जा प्रणाली और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करेगा।
2030 तक डेटा सेंटर क्षमता में बड़ा विस्तार
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की डेटा सेंटर क्षमता 2030 तक 1.5 गीगावॉट से बढ़कर करीब 6.5 गीगावॉट तक पहुंचने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि इस विस्तार से एआई सिस्टम, स्मार्ट ग्रिड, कूलिंग टेक्नोलॉजी, नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में करीब एक लाख इंजीनियरिंग रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
एआई, क्वांटम और स्वच्छ ऊर्जा बनेंगे नई तकनीकी क्रांति की ताकत
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एआई, 6जी, सेमीकंडक्टर और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर भारत के तकनीकी इकोसिस्टम को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा भारत की अगली तकनीकी क्रांति को शक्ति प्रदान करेंगे।
‘डेटा सेंटर अगली तेल अर्थव्यवस्था’
डॉ. जितेंद्र सिंह ने डेटा सेंटरों को “अगली तेल अर्थव्यवस्था” बताते हुए कहा कि भविष्य में डेटा नियंत्रण, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षित तकनीकी इकोसिस्टम वैश्विक अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार बनेंगे। उन्होंने कहा कि इस अवसर का पूरा लाभ उठाने के लिए सरकार, निजी उद्योग, दूरसंचार नेटवर्क, ऊर्जा क्षेत्र और शोध संस्थानों को मिलकर काम करना होगा।
क्वांटम मिशन में भारत की तेज प्रगति
उन्होंने कहा कि भारत आज कई क्षेत्रों में अग्रणी देशों के बराबर तकनीकी प्रगति कर रहा है। राष्ट्रीय क्वांटम मिशन का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि आठ वर्षों में 2,000 किलोमीटर सुरक्षित क्वांटम संचार नेटवर्क बनाने के लक्ष्य के मुकाबले भारत ने केवल तीन वर्षों में 1,000 किलोमीटर का आंकड़ा पार कर लिया है।
सरकार और उद्योग मिलकर बना रहे नया तकनीकी इकोसिस्टम
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने सेमीकंडक्टर मिशन, राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन और अंतरिक्ष व परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने जैसे कई बड़े फैसले लिए हैं। उन्होंने कहा कि भारत अब विदेशों की सफलता की कहानियों का इंतजार नहीं करता, बल्कि दुनिया अत्याधुनिक तकनीकों में भारत के साथ साझेदारी करना चाहती है।
मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और हरित ऊर्जा पर रहेगा फोकस
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की भविष्य की डेटा सेंटर वृद्धि मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं, टिकाऊ ऊर्जा प्रणालियों, उन्नत दूरसंचार कनेक्टिविटी, सब-सी केबल इंफ्रास्ट्रक्चर और स्मार्ट कूलिंग समाधानों पर निर्भर करेगी। उन्होंने कहा कि नीतिगत समर्थन और निजी क्षेत्र की भागीदारी के चलते भारत दुनिया के सबसे भरोसेमंद डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर केंद्रों में शामिल हो सकता है। (इनपुट: पीआईबी)


