ब्राजील में आयोजित प्री-CoP30 मंत्रीस्तरीय गोलमेज सम्मेलन में भारत ने जलवायु वित्त, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और स्थानीय स्तर पर आधारित समाधानों को मजबूत करने का आह्वान किया। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि जैसे दुनिया पेरिस समझौते के दस वर्ष पूरे होने का जश्न मना रही है, वैसे ही आगामी CoP30 सम्मेलन को यह स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि बहुपक्षवाद ही वैश्विक जलवायु कार्रवाई की सच्ची आधारशिला है।
भूपेंद्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने “सहयोग-आधारित और क्रियान्वयन-उन्मुख बहुपक्षवाद” की भावना को सशक्त किया है। उन्होंने भारत की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA), आपदा-रोधी बुनियादी ढांचा गठबंधन (CDRI) और इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) जैसे कदम भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा, “भारत हमेशा समाधान का हिस्सा रहा है, समस्या का नहीं।”
केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि बेलेम (Belem) में आयोजित होने वाला CoP30 सम्मेलन वैश्विक जलवायु सहयोग के लिए निर्णायक साबित होगा। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन केवल लक्ष्यों की चर्चा का नहीं, बल्कि “लोगों और पृथ्वी के लिए वास्तविक, मापने योग्य कदमों” की दिशा में ठोस परिणाम देने वाला होना चाहिए। यादव ने यह भी सुझाव दिया कि CoP30 को “अनुकूलन, वित्त, सहयोग और स्थानीय स्तर पर आधारित समाधानों” का सम्मेलन बनना चाहिए।
13 और 14 अक्टूबर को ब्रासीलिया में आयोजित इस प्री-CoP30 बैठक में विभिन्न देशों के मंत्री, वार्ताकार और नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। हालांकि यह बैठक संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा सम्मेलन (UNFCCC) की औपचारिक बैठक नहीं थी, फिर भी इसे जलवायु वित्त, ऊर्जा संक्रमण, अनुकूलन रणनीतियों और जैव विविधता संरक्षण जैसे अहम विषयों पर देशों के दृष्टिकोण को समन्वित करने के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक अवसर के रूप में देखा गया।
प्री-CoP30 की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, यह आयोजन ग्लोबल साउथ की ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की वापसी का प्रतीक है। यह सम्मेलन नवंबर 2025 में बेलेम में होने वाले CoP30 के लिए एक मजबूत वैचारिक और रणनीतिक नींव तैयार करेगा।-(ANI)


