समुद्री निर्यात को रफ्तार देने के लिए भारत की पहल, 83 देशों के साथ राउंडटेबल बैठक

केंद्रीय मत्स्य विभाग 21 जनवरी को देश के समुद्री निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक राउंडटेबल बैठक का आयोजन करेगा। इस बैठक में 83 से अधिक देशों के राजदूत और उच्चायुक्त भाग लेंगे। इसकी जानकारी मंगलवार को सरकार की ओर से दी गई।

समुद्री निर्यात में भारत की मजबूत स्थिति

भारत मछली और मत्स्य उत्पादों के निर्यात में दुनिया का छठा सबसे बड़ा देश है। वर्ष 2024-25 में समुद्री खाद्य पदार्थों का निर्यात 16.98 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया, जिसका मूल्य 62,408 करोड़ रुपए (7.45 अरब डॉलर) रहा। यह भारत के कुल कृषि निर्यात में लगभग 18% का योगदान करता है।

केंद्रीय मंत्री करेंगे कार्यक्रम की अध्यक्षता

इस राउंडटेबल बैठक की अध्यक्षता मत्स्य पालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन मंत्री राजीव रंजन सिंह करेंगे। कार्यक्रम में राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन और एस.पी. सिंह बघेल भी मौजूद रहेंगे।

छह महाद्वीपों के देश होंगे शामिल

एशिया, अफ्रीका, यूरोप, उत्तरी अमेरिका, ओशिनिया और लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियन क्षेत्र के देशों के राजदूत और उच्चायुक्त इस बैठक में भाग लेंगे। इससे समुद्री निर्यात को लेकर वैश्विक स्तर पर संवाद को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की भी भागीदारी

बैठक में केंद्रीय मंत्रालयों के साथ-साथ खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ), एजेंस फ्रांसेइस डी डेवलपमेंट (एएफडी), डॉयचे गेसेलशाफ्ट फर इंटरनेशनेल जुसामेनरबीट (जीआईजेड), बंगाल की खाड़ी कार्यक्रम (बीओबीपी), एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और कृषि विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय कोष (आईएफएडी) जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे।

समुद्री खाद्य व्यापार पर केंद्रित संवाद

यह सम्मेलन समुद्री खाद्य व्यापार, बाजार पहुंच, नियामक सहयोग और द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय साझेदारियों को मजबूत करने के उभरते अवसरों पर व्यवस्थित संवाद के लिए एक अहम राजनयिक और तकनीकी मंच के रूप में कार्य करेगा।

निवेश और स्थिरता पर रहेगा फोकस

आधिकारिक बयान के अनुसार, बातचीत का मुख्य उद्देश्य टिकाऊ, पता लगाने योग्य और मूल्यवर्धित समुद्री खाद्य व्यापार को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही निवेश, संयुक्त उद्यम, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण के नए रास्तों की भी तलाश की जाएगी।

खाद्य सुरक्षा और आजीविका को मिलेगा बढ़ावा

बयान में कहा गया है कि इस सम्मेलन के परिणामों से खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने, मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखलाओं में आजीविका सुधारने और स्थिरता, लचीलापन तथा समावेशी विकास के साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है। (इनपुट: आईएएनएस)