भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य) 33,660 करोड़ रुपए की एक पहल है, जिसका उद्देश्य देशभर में 100 प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्कों का विकास करना है। ये पार्क आधुनिक औद्योगिक बुनियादी ढांचा, विश्वसनीय सेवाएं और त्वरित अनुमोदन की सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे, जिससे नए उद्योग स्थापित करने में लगने वाले समय में कमी आएगी। योजना का उद्देश्य निवेश आकर्षित करना, एमएसएमई को सहायता देना, आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना, रोजगार के अवसरों का सृजन करना और सभी क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को गति देना है।
विनिर्माण नीति में नए दौर की शुरुआत
भारत का विनिर्माण क्षेत्र संरचनात्मक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। वर्तमान में यह जीडीपी में लगभग 16-17% का योगदान देता है और 27 मिलियन से अधिक श्रमिकों को रोजगार प्रदान करता है। राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन का लक्ष्य वर्ष 2035 तक इस क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ाकर 25% करना है। उद्योगों की संरचना में भी बदलाव आ रहा है। विनिर्माण क्षेत्र में मूल्यवर्धन का 46.3% हिस्सा मध्यम एवं उच्च प्रौद्योगिकी वाले उद्योगों से आता है। यह अधिक मूल्यवर्धन करने वाले और प्रौद्योगिकी-प्रधान विनिर्माण की दिशा में हो रहे बदलाव को दर्शाता है।
बुनियादी ढांचे और अनुमोदन की बढ़ती जरूरत
जैसे-जैसे उद्योगों का विस्तार हो रहा है, उन्हें विश्वसनीय बुनियादी ढांचे, कुशल लॉजिस्टिक्स तथा समयबद्ध और पूर्वानुमेय अनुमोदन प्रक्रियाओं की आवश्यकता बढ़ रही है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भी विविधता आ रही है, जिससे बेहतर कनेक्टिविटी वाले औद्योगिक क्षेत्रों का महत्व और अधिक बढ़ गया है।
प्लग-एंड-प्ले मॉडल से कम होगी लागत और देरी
प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क उद्योगों का संचालन शुरू होने से पहले ही आवश्यक बुनियादी ढांचा और साझा सुविधाएं विकसित कर इन सभी आवश्यकताओं को एक साथ उपलब्ध कराते हैं। इससे नई विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने में लगने वाले समय और लागत में कमी आती है। इस व्यवस्था का देशव्यापी विस्तार करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मार्च 2026 में भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य) को मंजूरी प्रदान की और 33,660 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ इसे 10 अप्रैल 2026 को अधिसूचित किया गया। भव्य को राज्यों और निजी डेवलपर्स की साझेदारी में लागू किया जा रहा है। यह योजना अनुमोदन प्रक्रियाओं को सरल बनाने, प्रभावी एकल-खिड़की प्रणाली विकसित करने और निवेशक-अनुकूल सुधार लागू करने के साथ देश की विनिर्माण क्षमता बढ़ाने तथा कारोबार करने में सुगमता को प्रोत्साहित करने पर जोर देती है। प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक इकोसिस्टम उद्योगों के लिए प्रवेश संबंधी बाधाओं को कम करेंगे और उन्हें निवेश से उत्पादन की ओर तेजी से बढ़ने में सहायता प्रदान करेंगे।
नीतिगत विकास: 2020 से पहले की व्यवस्था से प्लग-एंड-प्ले इकोसिस्टम तक
भारत में विनिर्माण क्षेत्र के विकास के प्रति दृष्टिकोण समय के साथ विकसित हुआ है। प्रत्येक चरण ने उद्योगों को सहायता देने और नए आर्थिक अवसर सृजित करने की देश की क्षमता का विस्तार किया है।
औद्योगिक एस्टेट और विशेष आर्थिक क्षेत्र
पहले चरण में औद्योगिक एस्टेट और विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) के विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया। इन क्षेत्रों में औद्योगिक भूमि, साझा बुनियादी ढांचा और नियामकीय प्रोत्साहन उपलब्ध कराए गए। फरवरी 2026 तक भारत में 370 अधिसूचित एसईजेड थे। इन क्षेत्रों ने 7.82 लाख करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित किया और 31.7 लाख से अधिक लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित किए।
बड़े विनिर्माण केंद्रों की ओर विस्तार
इसके बाद यह दृष्टिकोण अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्रों के विकास से आगे बढ़कर देशभर में बड़े विनिर्माण केंद्रों के विकास तक विस्तारित हुआ। इंडिया इंडस्ट्रियल लैंड बैंक (आईआईएलबी) पर 14 अक्टूबर 2026 तक 4,164 औद्योगिक पार्कों का मानचित्रण किया जा चुका था। इसी दौरान राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (एनआईसीडीपी) ने केवल औद्योगिक भूमि उपलब्ध कराने से आगे बढ़कर व्यापक दृष्टिकोण अपनाया। इसके अंतर्गत विनिर्माण क्षेत्रों को उपयोगिता सेवाओं, लॉजिस्टिक्स और शहरी सुविधाओं के साथ एकीकृत किया गया, जिससे अधिक समन्वित औद्योगिक केंद्रों का विकास संभव हुआ।
एकीकृत औद्योगिक केंद्रों का अनुभव
धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र (गुजरात), शेंद्रा-बिडकिन औद्योगिक क्षेत्र (महाराष्ट्र), विक्रम उद्योगपुरी (मध्य प्रदेश) और एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप, ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश) जैसे औद्योगिक केंद्रों ने एकीकृत नियोजन के लाभों को प्रदर्शित किया है।
नीतिगत यात्रा का विस्तार
2020 से पहले औद्योगिक एस्टेट और एसईजेड मॉडल में राजकोषीय प्रोत्साहन और निर्यात-उन्मुख नियामकीय व्यवस्था पर जोर था। इसके बाद एनआईसीडीपी के तहत एकीकृत बुनियादी ढांचे से युक्त स्मार्ट औद्योगिक शहरों का विकास हुआ। नियोजित औद्योगिक केंद्रों, मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और प्लग-एंड-प्ले पायलट परियोजनाओं ने इस मॉडल को आगे बढ़ाया। बजट 2026-27 में रासायनिक पार्क और पीएम मित्र जैसी क्षेत्र-विशिष्ट प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक सुविधाओं के जरिए क्लस्टर आधारित मॉडल पर जोर दिया गया। भव्य के तहत अब इस मॉडल को देशव्यापी स्तर पर विस्तारित करते हुए 100 प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क स्थापित करने का प्रस्ताव है।
भव्य की रूपरेखा
भव्य योजना के तहत औद्योगिक पार्कों के विकास के लिए प्रति एकड़ 1 करोड़ रुपए तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। योजना में आंतरिक सड़कें, बिजली आपूर्ति, जल नेटवर्क, जल निकासी प्रणाली, सामूहिक अपशिष्ट जल उपचार सुविधाएं, मूल्यवर्धित बुनियादी ढांचा तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) आधारित प्रशासन जैसी आवश्यक सुविधाएं शामिल हैं। भूमिगत उपयोगिता गलियारों के माध्यम से बिना खुदाई वाली व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे बुनियादी सुविधाओं का कुशल रखरखाव और औद्योगिक गतिविधियों का निर्बाध संचालन संभव हो सकेगा।
फैक्ट्री शेड से श्रमिक सुविधाओं तक
इन औद्योगिक पार्कों में पहले से निर्मित फैक्ट्री शेड, आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार की गई इकाइयां, परीक्षण एवं प्रमाणन सुविधाएं तथा भंडारण सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। श्रमिकों के कल्याण और उत्पादकता में सुधार के लिए श्रमिक आवास, स्वास्थ्य सेवाएं, कौशल विकास केंद्र तथा अन्य सामाजिक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। योजना के तहत स्वीकृत वित्तीय सहायता का अधिकतम 25% हिस्सा सड़क, रेल और लास्ट-माइल लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी जैसे बाहरी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए आवंटित किया जा सकता है, जिससे बड़े परिवहन नेटवर्क के साथ निर्बाध एकीकरण सुनिश्चित होगा।
छह वर्षों में 100 औद्योगिक पार्कों का लक्ष्य
इस योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2031-32 तक छह वर्षों की अवधि में लागू किया जाएगा। पहले चरण में दो चयन दौरों के माध्यम से चुनौती-आधारित प्रक्रिया के तहत अधिकतम 50 औद्योगिक पार्कों का चयन किया जाएगा। शेष पार्कों का चयन बाद के चरणों में किया जाएगा, जिससे भव्य योजना के तहत समर्थित औद्योगिक पार्कों की कुल संख्या 100 हो जाएगी। पार्कों का चयन करते समय परियोजनाओं की तैयारी, भूमि की उपलब्धता और औद्योगिक संभावनाओं को ध्यान में रखा जाएगा।
25 से 1,000 एकड़ तक होगा क्षेत्रफल
योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, भूमि के आकार से संबंधित अनिवार्य मानदंडों के आधार पर प्रत्येक औद्योगिक पार्क का क्षेत्रफल 25 से 1,000 एकड़ तक होगा। इन परियोजनाओं का क्रियान्वयन और प्रबंधन विशेष प्रयोजन संस्थाओं (एसपीवी) के माध्यम से किया जाएगा। ये संस्थाएं औद्योगिक पार्कों के विकास, संचालन, निवेशकों को आवश्यक सहायता प्रदान करने तथा दीर्घकालिक रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेंगी।
एमएसएमई और स्टार्टअप को भी मिलेगा लाभ
भव्य योजना के अंतर्गत विनिर्माण कंपनियां, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), स्टार्टअप और निवेशक साझा सुविधाओं तथा सरल और सुव्यवस्थित अनुमोदन प्रक्रियाओं का लाभ उठा सकते हैं।
पारदर्शी चयन के लिए भव्य पोर्टल
भव्य योजना के क्रियान्वयन और निगरानी के लिए जून 2026 में भव्य पोर्टल का शुभारंभ किया गया। यह पोर्टल चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाते हुए परियोजनाओं को प्रस्तुत करने, उनके मूल्यांकन और आकलन की प्रक्रिया को सुगम बनाता है।
प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क की अवधारणा
मुख्य बुनियादी ढांचा वह उच्च-स्तरीय बुनियादी ढांचा है, जिसका प्रमुख उद्देश्य आसपास के विकास क्षेत्रों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना होता है। इन सुविधाओं का विभिन्न विकास परियोजनाओं द्वारा साझा रूप से उपयोग किया जाता है और इनका विकास सामान्यतः स्थानीय सरकारों द्वारा किया जाता है। इसमें जलापूर्ति, जल निकासी, सीवरेज/सेप्टेज, सड़कें, स्ट्रीट लाइट और बिजली आपूर्ति जैसी प्रमुख बुनियादी सुविधाओं की प्रणालियों का विकास शामिल है।
निवेश से उत्पादन तक की प्रक्रिया होगी तेज
प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क ऐसे पूर्व-विकसित औद्योगिक इकोसिस्टम हैं, जहां भूमि, मुख्य बुनियादी ढांचा, उपयोगिता सेवाएं और साझा सुविधाएं पहले से उपलब्ध कराई जाती हैं। कई मामलों में अनुमोदन और आवश्यक प्रारंभिक स्वीकृतियों की प्रक्रिया को एकल-खिड़की प्रणाली के माध्यम से सरल बनाया जाता है। इससे उद्यमों को प्रारंभिक लागत और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में होने वाली देरी कम करने के साथ निवेश संबंधी निर्णय से उत्पादन शुरू करने तक की प्रक्रिया में तेजी लाने में मदद मिलती है।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बढ़ी प्रासंगिकता
आपूर्ति श्रृंखलाओं के विभिन्न स्थानों पर विस्तार और विनिर्माण प्रक्रियाओं में समय के बढ़ते महत्व के कारण ऐसे मॉडल अधिक प्रासंगिक होते जा रहे हैं। निवेशक अब ऐसे स्थानों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जहां भूमि की उपलब्धता, कनेक्टिविटी, उपयोगिता सेवाओं और नियामकीय प्रक्रियाओं के संबंध में पूर्वानुमेयता हो।
260 प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क
प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्कों की अवधारणा भारत में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। केंद्रीय बजट 2025-26 में प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्कों के विकास के लिए 2,500 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया था। वर्तमान में भारत में 260 प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों और राज्यों में बुनियादी ढांचे से युक्त विनिर्माण इकोसिस्टम को अपनाने की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाते हैं।
क्षेत्र-विशिष्ट औद्योगिक सुविधाओं का विस्तार
प्लग-एंड-प्ले मॉडल का विस्तार अब क्षेत्र-विशिष्ट औद्योगिक सुविधाओं तक भी किया जा रहा है। जुलाई 2026 में सरकार ने तीन रासायनिक पार्कों के विकास के लिए भव्य-रसायन योजना को मंजूरी दी। इन पार्कों में रासायनिक विनिर्माण उद्योगों के लिए साझा सुविधाएं और पर्यावरणीय सुरक्षा उपाय उपलब्ध कराए जाएंगे।
धोलेरा एसआईआर: एकीकृत औद्योगिक शहर
गुजरात का धोलेरा नई पीढ़ी के औद्योगिक शहर के रूप में उभर रहा है। यहां शुरुआत से ही चौड़ी सड़कों, विश्वसनीय उपयोगिता सेवाओं, डिजिटल नेटवर्क और आधुनिक शहरी सुविधाओं की योजना बनाई गई है। बिजली, जलापूर्ति, गैस और जल निकासी प्रणालियां एक साझा भूमिगत नेटवर्क के माध्यम से संचालित होती हैं, जिससे उद्योगों के लिए प्लग-एंड-प्ले वातावरण तैयार होता है।
उन्नत विनिर्माण का केंद्र
यह क्षेत्र उन्नत विनिर्माण के केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। यहां जिन प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, उनमें सेमीकंडक्टर, एयरोस्पेस एवं रक्षा, सौर ऊर्जा उपकरणों का विनिर्माण, ग्रीन हाइड्रोजन, जैव प्रौद्योगिकी और भारी इंजीनियरिंग शामिल हैं। बंदरगाहों, हवाई अड्डों, एक्सप्रेसवे और समर्पित माल गलियारे से मजबूत संपर्क धोलेरा को घरेलू और वैश्विक बाजारों से जोड़ता है।
495 एकड़ भूमि आवंटित
धोलेरा में 11 भूखंडों में कुल 495 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। यहां 97,328 करोड़ रुपए के निवेश की संभावनाएं हैं और रोजगार के 6,000 से अधिक अवसर सृजित होने की उम्मीद है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की सेमीकंडक्टर इकाई और रिन्यू पावर के सोलर मॉड्यूल विनिर्माण संयंत्र जैसी प्रमुख परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटित की गई है।
एक नए विनिर्माण इकोसिस्टम की ओर
भारत का विनिर्माण परिदृश्य एकीकृत औद्योगिक विकास पर अधिक जोर देते हुए विकसित हो रहा है। पारंपरिक औद्योगिक क्षेत्रों से सुनियोजित विनिर्माण केंद्रों की ओर बढ़ना इस बदलते दृष्टिकोण को दर्शाता है। भव्य योजना इस परिवर्तन की दिशा में अगला कदम है। औद्योगिक विकास से जुड़ी अन्य पहलों के साथ मिलकर यह योजना भारत के विनिर्माण आधार को मजबूत करने और वैश्विक विनिर्माण क्षेत्र में उसकी भूमिका को और सशक्त बनाने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। (इनपुट: पीआईबी)


