केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि भारत का फार्मा निर्यात 27.8 बिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है और वर्ष के अंत तक 30 बिलियन डॉलर के पार पहुंचने की संभावना है। इसके साथ ही, घरेलू फार्मा बाजार, जो फिलहाल 60 अरब डॉलर का है, 2030 तक 130 अरब डॉलर से अधिक होने की आशा जताई गई है।
फार्मा और मेडटेक में तेजी से हो रहा विकास
भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच एक आधिकारिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर के बाद यह बात कही। डीबीटी की जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) और उत्तर प्रदेश प्रमोट फार्मा काउंसिल (यूपीपीपीसी) के माध्यम से संपन्न यह समझौता फार्मा, बायोटेक और मेडटेक क्षेत्रों में नवाचार, उद्यमिता और निवेश को बढ़ावा देने के लिए केंद्र-राज्य साझेदारी के मॉडल का हिस्सा है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वर्तमान में देश में चिकित्सा उपकरण निर्माताओं की संख्या लगभग 800 है और भारत में चिकित्सा प्रौद्योगिकी क्षेत्र की वार्षिक वृद्धि दर 15 से 20 प्रतिशत है।
नवाचार और स्टार्टअप के लिए अनुकूल माहौल
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश में जैव प्रौद्योगिकी (Biotech) स्टार्टअप्स की संख्या 2014 में केवल 50 थी, जो अब 11,000 से अधिक हो चुकी है। यह परिवर्तन भारत के नवाचार और उद्यमिता वातावरण में व्यापक सुधार का प्रमाण है।
भारत अब दुनिया के 60 प्रतिशत से अधिक टीकों का निर्माण करता है, जो 200 से अधिक देशों में निर्यात किए जाते हैं। इससे भारत को वैश्विक वैक्सीन आपूर्ति श्रृंखला में एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में पहचान मिली है।
DBT और उत्तर प्रदेश सरकार का साझेदारी मॉडल
इस MoU के अंतर्गत, DBT की जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) और उत्तर प्रदेश प्रमोट फार्मा काउंसिल (UPPPC) के माध्यम से, फार्मा, बायोटेक और मेडटेक क्षेत्रों में नवाचार, निवेश और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मज़बूती देने पर ज़ोर दिया जाएगा।
लखनऊ में बायोटेक पार्क, ग्रेटर नोएडा में मेडिकल डिवाइस पार्क और ललितपुर में बल्क ड्रग और फार्मा पार्क जैसी परियोजनाओं को इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानते हुए विस्तारित किया जाएगा।
“भारत में निर्मित, विश्व के लिए निर्मित”
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने जोर देकर कहा कि यह साझेदारी भारत को “भारत में निर्मित, विश्व के लिए निर्मित” स्वास्थ्य सेवा समाधान उपलब्ध कराने वाला वैश्विक केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि यह पहल ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है।
जैव-अर्थव्यवस्था में भारत की प्रगति
भारत की जैव-अर्थव्यवस्था (Bioeconomy) वर्तमान में 165 बिलियन डॉलर से अधिक की है। सरकार ऐसे केंद्र-राज्य साझेदारी मॉडल्स के माध्यम से भारत को वैश्विक बायोफार्मा और मेडटेक समाधान हब के रूप में उभरते देखने की रणनीति पर कार्य कर रही है।
BIRAC के एमडी डॉ. जितेंद्र कुमार ने कहा कि यह सहयोग कौशल विकास, सुरक्षित व्यवसायीकरण और नवाचार को तेज़ी से बाज़ार तक पहुंचाने पर केंद्रित होगा, जिससे सामाजिक और आर्थिक लाभों में वृद्धि हो सकेगी।
समारोह में DBT सचिव और BIRAC अध्यक्ष डॉ. राजेश एस. गोखले, BIRAC के प्रबंध निदेशक डॉ. जितेंद्र कुमार, उत्तर प्रदेश सरकार के सलाहकार श्री अवनीश कुमार अवस्थी, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री अमित कुमार घोष सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


