केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शनिवार को कहा कि भारत “हाइड्रोजन के हर अणु में भरोसा” बना रहा है और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं गैस कंपनियां (PSUs) 2030 तक 900 किलो टन प्रति वर्ष (KTPA) की हरित हाइड्रोजन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखती हैं।
उन्होंने बताया कि अप्रैल 2025 में शुरू की गई ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन स्कीम (GHCI) यह सुनिश्चित करती है कि केवल नवीकरणीय ऊर्जा से उत्पादित हाइड्रोजन — जिसमें प्रति किलोग्राम 2 किलोग्राम से कम CO₂ उत्सर्जन होता है — ही ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ कहलाएगी।
पुरी ने कहा कि IOCL, BPCL, HPCL, GAIL, ONGC, NRL और CPCL जैसी कंपनियां मिलकर 900 KTPA क्षमता स्थापित कर रही हैं, जिससे ग्रे हाइड्रोजन की जगह स्वच्छ हाइड्रोजन का उपयोग बढ़ेगा और देश को लगभग ₹1 लाख करोड़ के आयात खर्च की बचत होगी।
सरकार के अनुमान के अनुसार, भारत 2030 तक वैश्विक हरित हाइड्रोजन मांग में 10% हिस्सेदारी हासिल कर सकता है।
इससे पहले, केंद्रीय मंत्री श्रीपद नाईक ने बताया था कि भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित बिजली क्षमता 260 GW के करीब पहुंच चुकी है, जिसमें सौर और पवन ऊर्जा का सबसे बड़ा योगदान है।
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत सरकार ने ₹17,000 करोड़ के प्रोत्साहन स्वीकृत किए हैं और 3,000 मेगावाट प्रति वर्ष की इलेक्ट्रोलाइज़र क्षमता तथा 8.62 लाख टन प्रति वर्ष ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के लिए परियोजनाएं आवंटित की हैं।


