21/04/26 | 3:32 pm | PLISFPI | फूड

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फूड प्रोसेसिंग में भारत की मजबूत होती पकड़

भारत का फूड प्रोसेसिंग सेक्टर तेजी से आर्थिक विकास का अहम आधार बनता जा रहा है और इसमें सरकार की Production-Linked Incentive Scheme for Food Processing Industry (PLISFPI) की बड़ी भूमिका है। यह योजना देश को वैश्विक स्तर पर फूड मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में काम कर रही है।

₹10,900 करोड़ के बजट वाली इस योजना के तहत फरवरी 2026 तक 165 परियोजनाओं को मंजूरी, ₹2,162 करोड़ से अधिक प्रोत्साहन राशि और करीब 3.39 लाख रोजगार सृजित किए जा चुके हैं, जो निर्धारित लक्ष्य से अधिक है।

भारत, जो फल और सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, फूड प्रोसेसिंग में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने की क्षमता रखता है। इसी उद्देश्य से इस योजना को लागू किया गया, ताकि उत्पादन बढ़े, वैल्यू एडिशन हो और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा मजबूत हो।

यह योजना तीन मुख्य हिस्सों पर आधारित है—

पहला, रेडी-टू-ईट और रेडी-टू-कुक फूड, प्रोसेस्ड फल-सब्जियां, मरीन प्रोडक्ट्स और चीज जैसे उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा देना।

दूसरा, MSMEs और इनोवेटिव व ऑर्गेनिक उत्पादों को प्रोत्साहन देना।

तीसरा, भारतीय ब्रांड्स को वैश्विक बाजार में स्थापित करने के लिए ब्रांडिंग और मार्केटिंग सपोर्ट देना।

इसके अलावा, मिलेट आधारित उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए अलग से ₹800 करोड़ का प्रावधान भी किया गया है।

योजना के तहत देश में 34 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ी है और प्रोसेस्ड फूड के निर्यात में 13.23% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है।

सरकार के अनुसार, यह योजना न केवल उद्योग को मजबूत कर रही है, बल्कि किसानों, MSMEs और युवाओं के लिए नए अवसर भी पैदा कर रही है।

कुल मिलाकर, PLISFPI भारत के फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को अधिक मजबूत, प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम पहल साबित हो रही है।