सीजफायर पर भारत का समर्थन, शांति प्रयासों को बताया अहम कदम

भारत ने शुक्रवार को इजराइल और लेबनान के बीच हुए युद्धविराम का स्वागत करते हुए कहा कि वह शांति की दिशा में उठाए गए हर कदम का समर्थन करता है।

विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया

नई दिल्ली में साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा, “हम युद्धविराम का स्वागत करते हैं। हम हर उस कदम का स्वागत करते हैं जो शांति की ओर ले जाता है।”

अमेरिका की घोषणा के बाद आया बयान

विदेश मंत्रालय का यह बयान उस घोषणा के बाद आया है, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को इजराइल और लेबनान के बीच युद्धविराम की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य ईरान से जुड़े एक और मोर्चे पर अस्थायी रूप से तनाव कम करना है।

हिजबूल्लाह और सीमा तनाव की पृष्ठभूमि

लेबनान सीधे तौर पर इजराइल के साथ औपचारिक युद्ध में शामिल नहीं है, लेकिन दक्षिणी लेबनान के बड़े हिस्सों पर हिजबूल्लाह का नियंत्रण है। इस संगठन ने इजराइल पर कई हमले किए हैं, जिसके जवाब में इजराइल ने भी कार्रवाई की है। हिजबूल्लाह पर नियंत्रण करने में असमर्थ रहने के कारण लेबनान को इजरायली जवाबी हमलों का खामियाजा भुगतना पड़ा है।

हमास पर भारत का रुख स्पष्ट

जब इजराइल द्वारा भारत से हमास को आतंकवादी संगठन घोषित करने के अनुरोध और उसे निरस्त्र करने की नीति के बारे में पूछा गया, तो जायसवाल ने कहा, “हमारे पास एक प्रक्रिया है और ऐसे मुद्दों को उसी प्रक्रिया के तहत संबोधित किया जाता है।”

इजरायल की भारत से अपील

गुरुवार को इजराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने दुनियाभर के प्रमुख हिंदू नेताओं के एक समूह के साथ बातचीत के दौरान इस बात पर जोर दिया कि भारत को हमास को आतंकवादी संगठन घोषित करना चाहिए।

कट्टरपंथी संगठनों पर इजरायल का बयान

गिदोन सार ने कहा, “मैंने इस बात के महत्व पर जोर दिया कि भारत हमास को आतंकवादी संगठन घोषित करे। हमास के सभी अन्य कट्टरपंथी इस्लामी आतंकी संगठनों, जिसमें लश्कर ए तैयबा भी शामिल है, से संबंध हैं।”

भारत-इजरायल संबंधों पर जोर

इजरायली विदेश मंत्री ने कहा कि वह इस विशिष्ट समूह को जानकारी देकर सम्मानित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने भारत के साथ इजरायल के संबंधों में मजबूती के सकारात्मक रुझानों और इस रिश्ते के महत्व पर भी चर्चा की।

क्षेत्रीय संघर्ष के व्यापक प्रभाव

उन्होंने कहा, “इन संगठनों का घोषित उद्देश्य इजरायल का अस्तित्व समाप्त करना है और वे उसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए काम कर रहे हैं। इजरायल ने सभी मोर्चों पर यह दिखाया है कि उसका पलड़ा भारी है। उसने ईरान के नेतृत्व वाले कट्टरपंथी इस्लाम के ‘आतंकी ऑक्टोपस’ को काफी कमजोर किया है। इस संघर्ष के प्रभाव मध्य पूर्व से बाहर भी देखने को मिलेंगे।” (इनपुट: आईएएनएस)