भारत के वस्त्र निर्यात क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2025-26 में वैश्विक बाजारों में स्थिर प्रदर्शन करते हुए 2.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। वस्त्र मंत्रालय के अनुसार, कुल निर्यात बढ़कर ₹3,16,334.9 करोड़ हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के ₹3,09,859.3 करोड़ से अधिक है। यह वृद्धि वैश्विक मांग में मजबूती और भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को दर्शाती है।
तैयार वस्त्र (रेडीमेड गारमेंट्स) निर्यात में प्रमुख योगदान देते रहे, जिसमें 2.9 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह ₹1,39,349.6 करोड़ तक पहुंच गया। वहीं, कॉटन यार्न, फैब्रिक्स, मेड-अप्स और हैंडलूम उत्पादों में 0.4 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज हुई, जो ₹1,02,399.7 करोड़ पर पहुंच गई। दूसरी ओर, मैन-मेड टेक्सटाइल्स ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए 3.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ₹42,687.8 करोड़ का आंकड़ा छू लिया।
मूल्य वर्धित श्रेणियों में हस्तशिल्प (हैंडमेड कार्पेट्स को छोड़कर) सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र रहा, जिसमें 6.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह ₹15,855.1 करोड़ तक पहुंच गया।
निर्यात के लिहाज से भारत ने अपने बाजारों का दायरा भी बढ़ाया है। अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच 120 से अधिक देशों में निर्यात में वृद्धि देखी गई। संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन, जर्मनी, स्पेन, जापान और कई अफ्रीकी देशों में मांग बढ़ना इस बात का संकेत है कि भारत का निर्यात आधार अधिक विविध हो रहा है।
सरकारी नीतिगत समर्थन ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई है। RoSCTL और RoDTEP जैसी योजनाओं को मार्च 2026 के बाद भी जारी रखने से निर्यातकों को राहत मिली है। इसके अलावा, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA), ब्रिटेन, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ व्यापार समझौते तथा भारत-यूरोपीय संघ (EU) समझौते पर प्रगति से आने वाले समय में निर्यात को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
वस्त्र मंत्रालय के अनुसार, निर्यात में यह स्थिर वृद्धि सरकार के उस लक्ष्य को मजबूत करती है, जिसके तहत मूल्य वर्धित उत्पादों को बढ़ावा देना, रोजगार सृजन करना और भारत को वैश्विक वस्त्र उद्योग में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना शामिल है।
-(PIB)


