हरित ऊर्जा के बढ़ते उपयोग से भारत का थर्मल कोयला आयात चार साल के निचले स्तर पर

भारत में स्थानीय कोयला उत्पादन बढ़ने और नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) उत्पादन में तेज वृद्धि के कारण जनवरी-मई 2026 के दौरान थर्मल कोयले का आयात चार वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।

कमोडिटी कंसल्टेंसी बिगमिंट (BigMint) की रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में भारत का कुल थर्मल कोयला आयात 6.5 करोड़ टन रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 12 प्रतिशत कम है।

दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा थर्मल कोयला आयातक भारत लंबे समय से आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रहा है। सरकार का लक्ष्य इस वर्ष बिजली उत्पादन में आयातित थर्मल कोयले के उपयोग को कम-से-कम 30 प्रतिशत तक घटाना है।

देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी Coal India ने भी अपनी सहायक इकाइयों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए थे, क्योंकि एल-नीनो प्रभाव से बढ़ी गर्मी के कारण बिजली की मांग में वृद्धि दर्ज की गई।

रिपोर्ट के अनुसार, आयातित कोयले की ऊंची कीमतें और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण बढ़ी माल ढुलाई लागत (Freight Rates) ने भी आयात को प्रभावित किया।

नवीकरणीय ऊर्जा का बढ़ता योगदान

जनवरी से मई 2026 के बीच भारत का कुल बिजली उत्पादन 5 प्रतिशत बढ़ा, जबकि नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में 22 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की गई।

21 मई को देश की अधिकतम बिजली मांग (Peak Power Demand) 270 गीगावाट के अनुमानित स्तर को पार कर गई। यह बढ़ती गर्मी और हीटवेव के कारण हुआ।

ग्रिड इंडिया (Grid-India) के आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में भारत की बिजली मांग 11.2 प्रतिशत बढ़कर पिछले दो वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।

इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए थर्मल बिजली उत्पादन में भी 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो मई 2024 के बाद सबसे अधिक है।

वहीं, मई महीने में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन 29.31 प्रतिशत बढ़कर 27.58 अरब यूनिट (बिलियन किलोवाट-घंटा) तक पहुंच गया। इसके साथ ही देश के कुल बिजली मिश्रण (Power Mix) में हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी रिकॉर्ड 17.9 प्रतिशत हो गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि सौर और पवन ऊर्जा क्षमता में लगातार विस्तार तथा घरेलू कोयला उत्पादन में वृद्धि के चलते आने वाले वर्षों में भारत की आयातित कोयले पर निर्भरता और कम हो सकती है।

-(इनपुटःरॉयटर्स)